वाराणसी। आशीष राय
उज्जैन में गणेश विसर्जन की परंपरा को इस बार प्रकृति संरक्षण का नया रंग मिला। नदियों और तालाबों के बजाय दफ्तर परिसर में कड़ाव सजाकर बप्पा को विदाई दी गई। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मिट्टी की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन कर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। मंत्रोच्चार के बीच हुए इस अनूठे विसर्जन में आस्था के साथ जल संरक्षण की चिंता भी नजर आई। बप्पा की विदाई के साथ ही शहरवासियों से घरों में ही इको-फ्रेंडली विसर्जन की अपील की गई।
(https://www.youtube.com/watch?v=4JxUBgYUQnA)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में दी गई पर्यावरण संरक्षण की सीख का उज्जैन में सीधा असर देखने को मिला है। बारिश की बेरुखी और नदियों में कम होते पानी को देखते हुए विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने आगर रोड स्थित अपने ऑफिस पर अनोखी पहल की। उन्होंने किसी नदी या तालाब के बजाय दफ्तर परिसर में ही कड़ाव को विधि-विधान से सजाया और पंडित जी के मंत्रोच्चार के बीच गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन कर शहरवासियों को एक नया और प्रेरणादायी संदेश दिया। विधायक कालूहेड़ा ने बताया कि वर्ष 2014 से लोकमान्य तिलक गणेशोत्सव महाआयोजन समिति घर-घर मिट्टी के गणेश स्थापित करने का जन-आंदोलन चला रही है। जलस्रोतों में जल स्तर बेहद कम होने से जल-संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। इसके अलावा नदियों में विसर्जन के बाद मूर्तियों के क्षत-विक्षत होने से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं। ऐसे में बर्तन या कड़ाव में विसर्जन का तरीका बेहद सुलभ और पवित्र है। विसर्जन के बाद इस पूजित जल और मिट्टी को तुलसी जी या घर के पेड़-पौधों में डालने से अपार पुण्य लाभ मिलता है। इस अनूठे विसर्जन कार्यक्रम में विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सहभागिता निभाई। सबने मिलकर पीएम मोदी की मंशा के अनुरूप इको-फ्रेंडली विसर्जन का संकल्प दोहराया। विधायक कालूहेड़ा ने सभी उज्जैनवासियों को गणेश विसर्जन पर्व की शुभकामनाएं दीं और अपील की कि वे अपने-अपने घरों पर ही बप्पा को विदाई देकर प्रकृति संरक्षण के इस महाभियान का हिस्सा बनें।
