चित्रकूट में बारिश, बाढ़ और अब बर्बादी का मंजर

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लखनऊ, राजेंद्र तिवारी। चित्रकूट में बारिश, बाढ़ और बर्बादी का मंजर अब भी दिखाई दे रहा है। मंदाकिनी में आई बाढ़ ने चित्रकूट में सबकुछ तहस नहस कर डाला। छह दिन बाद गुरुवार देर रात मंदाकिनी खतरे के निशान से नीचे उतरी तो बर्बादी का वह भयावह मंजर दिखा, जिसने धर्मनगरी को कई साल पीछे धकेल दिया। रामघाट में गोस्वामी तुलसीदास का मंदिर मंदाकिनी के वेग में खंडित हो गया। यही नहीं ऊपरी हिस्सा मंदाकिनी में ही समा गया। आरती स्थल भी पूरी तरह बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं हनुमान मंदिर पूरी तरह टूट गया। इसके अलावा रामघाट में ज्यादातर दुकानों व मकानों के शटर व दरवाजे उखड़कर मंदाकिनी की बाढ़ में समा गए हैं। पूरे रामघाट में सिर्फ मलबा ही नजर आ रहा है, जिसे हटाने में टीमें पसीना छोड़ रही हैं।
बता दें कि 29 अगस्त को लाल निशान से करीब साढ़े आठ मीटर ऊपर पहुंची मंदाकिनी ने जमकर तबाही मचाई। यूपी-एमपी क्षेत्र में दो से तीन मंजिला मकान जलमग्न हो गए। ऊपरी इलाकों के मठ-मंदिरों में भी पानी घुस गया। नदी का पानी एक दिन पहले गुरुवार को बारिश थमने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगा था। देर रात करीब 11 बजे लाल निशान से नीचे पानी पहुंचने पर लोगों ने राहत भरी सांस ली। शुक्रवार को मंदाकिनी का पानी रामघाट में सीढ़ियों के नीचे पहुंच गया। मंदाकिनी के जलप्रलय से हुई बर्बादी दिखी तो लोगों के होश गुम हो गए। घाट में करीब 10 फीट चौड़ा गहरा गड्ढा हो गया है। खोया-पाया केन्द्र बहने के साथ ही चरखारी मंदिर का गेट भी टूट गया। यहीं पर भारी-भरकम पेड़ मंदाकिनी के वेग को झेल नहीं पाया और जड़ से उखड़कर गिर गया। फुटओवर ब्रिज में नीचे की तरफ लगी लोहे की चद्दर उखड़ गई है। इसके साथ ही निर्मोही अखाड़े की दीवार में काफी बड़ी लंबी दरार आ गई है। रामघाट में प्रदेश सरकार ने पर्यटन विकास के तौर पर करोड़ों की धनराशि खर्च की थी। जिसमें आरती स्थल को भव्य बनाया गया था। मंदाकिनी में आए जलप्रलय के दौरान रामघाट में लगे लाल पत्थर ज्यादातर उखड़ गए। सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। रामघाट में करीब एक दर्जन से अधिक बिजली के खंभों के साथ ही तार टूट गए हैं। पर्यटन विकास के तौर पर की गई लाइटिंग पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

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