कृष्ण जन्माष्टमी: आधी रात हुआ अजन्मे का अवतरण

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मथुरा, राजेंद्र तिवारी। मथुरा के भागवत भवन में आधी रात अजन्मे का जब अवतरण हुआ तो पूरी मथुरा नगरी में हर्षोल्लास छा गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़ों के बीच मध्य रात्रि 12 बजे अजन्मे का जन्माभिषेक किया गया। शंख और घंटों की गूंज के बीच देवकी जायौ ललना मैं वेदन में सुनि आई के समवेत स्वरों ने हर किसी को आस्था-भक्ति और श्रद्धा की त्रिवेणी में डूबो दिया। कन्हैया के जन्म के उल्लासित श्रद्धालु जहां खड़े थे, वहीं थिरक उठे।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर दो दिन पहले ही अपने पालनहार के प्राकट्योत्सव के लिए दुल्हन की तरह सजा हुआ था। शुक्रवार को सुबह प्रात: 5:30 बजे सबसे पहले शहनाई एवं नगाड़ों के धुन पर मंगला आरती हुई तो भक्तों का रेला दर्शन के लिए उमड़ना शुरु हो गया। प्रात: 8:00 बजे भगवान का दिव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। इसके बाद दोपहर 01:00 बजे लीला मंच पर भजन गायन हुआ तो हजारों श्रद्धालु रात तक भजनों पर थिरकते रहे। हर कोई श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में खुद को पाकर धन्य था। श्रद्धालु गोविंद नगर स्थित गेट से प्रवेश करते हुए ठाकुर केशवदेव जी व योगमाया के दर्शन करते हुए गर्भगृह की ओर प्रस्थान कर रहे थे। भीड़ का रेला लगातार बढ़ता जा रहा था। श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित भागवत भवन में जन्मोत्सव के महाभिषेक की शुरुआत सोमवार की रात्रि 10 बजे श्री गणपति एवं नवग्रह स्थापना-पूजन से हुई। करीब पचास मिनट तक नवग्रह स्थापना पूजन चला। तत्पश्चात, 1008 कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहत्तार्चन हुआ। जैसे ही रात्रि 11.59 बजे प्राकट्य दर्शन के लिए पट बंद हुए तो भीड़ बेकाबू हो गयी। भागवत भवन की ओर श्रद्धालुओं का रेला ऐसा उमड़ा की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों के भी हाथ-पांव फूल गए।
किसी भी तरह भीड़ की गतिशीलता को बनाए रखने के प्रयास किए जाते रहे। जयकारों से समूचा जन्मस्थान परिसर ही नहीं आसपास का क्षेत्र भी गुंजाएमान हो उठा। पंचरत्नी पोषाक में युगल जोड़ी के दर्शन करके हर कोई भाव-विभोर हो रहा था। हर श्रद्धालु जन्माभिषेक की एक झलक के लिए खुद को भागवत भवन में रुकने की जद्दोजाहद में रहा। ठीक एक मिनट बाद रात्रि 12 बजे प्राकट्य आरती के लिए ठाकुरजी के पट खुलते ही संपूर्ण मंदिर परिसर ढोल-नगाड़े, मृदंग, झांझ-मंजीरों से गूंज उठा। तत्पश्चात, 12.10 बजे कामधेनु गाय के थनों के नीचे श्रीकृष्ण की प्रतिमा विराजमान कर दी गयी। थनों से निकलते दूध से ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक हुआ। करीब 20 मिनट बाद रात्रि 12.25 बजे ठाकुरजी को रजत कमल पुष्प में विराजमान किया गया।
रजत कमल में केसर में लिपटे ठाकुरजी का जन्म महाभिषेक श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के सानिध्य में ट्रस्टी अनुराग डालमिया ने शुरु किया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं वरिष्ठ सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी उनके सहयोग में जुटे रहे। दूध, दही, घी, बूरा, शहद, दिव्य औषधि एवं वनस्पतियों महाभिषेक करीब 20 मिनट में सम्पन्न हुआ। इसके बाद रात्रि 12.45 बजे ठाकुरजी की श्रृंगार आरती हुई। इसके बाद रात्रि 1:30 बजे शयन आरती के उपरांत मंदिर के पट कर दिए गए। इसके साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया।

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