वाराणसी, राजेंद्र तिवारी। उमा निलियम वेलफेयर सोसाइटी, रामनगर स्थित रोमा बिल्डिंग में रविवार को काशिका वर्किंग आर्टिस्ट ग्रुप के तत्वावधान में एक दिवसीय चित्रकला शिविर का भव्य आयोजन किया गया। शिविर का विषय ‘रामायण’ रखा गया था। इस अवसर पर देशभर से लगभग 70 से 80 कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए रामायण के विभिन्न प्रसंगों को अपने कैनवास पर साकार किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रेमचंद विश्वकर्मा, विशिष्ट अतिथि दृश्य कला संकाय बीएचयू की उत्तमा दीक्षित, पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक एवं पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. प्रभाष झा, ललित कला विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील विश्वकर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष वसंत कॉलेज प्रो. डॉ. सत्येंद्र सिंह बावनी, सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. कल्पना, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता तथा सोसाइटी के उपाध्यक्ष एवं कलाकार पंकज कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुआ। इस अवसर पर अनुकृति शर्मा और आदिति शर्मा ने मनमोहक शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी पारंपरिक वेशभूषा और आत्मविश्वास ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। इसके बाद अपने उद्बोधन में प्रो. डॉ. प्रेमचंद विश्वकर्मा ने रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला की विशेषताओं के साथ विविध प्रसंगों का अत्यंत रोचक, भावपूर्ण एवं सजीव वर्णन किया। उन्होंने सीता स्वयंवर, अहिल्या उद्धार, केवट प्रसंग, सनकादिक ऋषियों से जुड़े प्रसंग सहित अनेक घटनाओं का आध्यात्मिक एवं लौकिक महत्व समझाया। उनके प्रभावशाली वर्णन ने उपस्थित कलाकारों को चित्रांकन के लिए विषय चयन एवं कल्पना का सशक्त आधार प्रदान किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो रामायण के सभी दृश्य साक्षात उपस्थित हो उठे हों। दृश्य कला संकाय, बीएचयू की अध्यक्ष उत्तमा दीक्षित ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को कला के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने अपने अनुभव भी साझा किए। वहीं डॉ. प्रभाष झा ने सभी प्रतिभागी कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। विश्वविख्यात कलाकार प्रो. डॉ. सुनील विश्वकर्मा, जिन्होंने अयोध्या में विराजमान रामलला की प्रतिमा के डिजाइन का सृजन किया है और जिसके आधार पर रामलला की मूर्ति का निर्माण हुआ, ने युवा कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण ही एक कलाकार की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विषयों को अपनी कला के माध्यम से जीवंत रखने का संदेश देते हुए सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। इस चित्रकला शिविर के संयोजक डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता तथा आयोजक पंकज कुमार शर्मा हैं। पंकज कुमार शर्मा के अथक परिश्रम, समर्पण एवं उत्कृष्ट आयोजन क्षमता के कारण इस भव्य कार्यक्रम का सफल आयोजन उमा निलियम वेलफेयर सोसाइटी परिसर में संभव हो सका। आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सराहनीय रहीं। कार्यक्रम में उमा निलियम वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारी एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाष पांडे, शिवदत्त सिंह तथा एसपी शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके साथ ही वरिष्ठ कलाकार पंकज शर्मा (बिहार), मधुलिका, मोनिका वर्मा, डॉ. रीना सिंह, प्रतिमा शर्मा, शालू, आकृति, ईशा सहित अनेक वरिष्ठ और समकालीन कलाकारों की उपस्थिति रही। साथ ही सोसाइटी की अंकिता शर्मा, अनीता सिंह, नीलिमा रैना, अर्चना, प्रियंका, विनीता, लवीना, रति, प्रिया, संगीता सहित अनेक महिलाओं, बच्चों एवं सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। देशभर से आए कलाकारों को चित्र सृजन करते हुए देखना उपस्थित लोगों के लिए एक नया और प्रेरणादायक अनुभव रहा। अनेक महिलाओं ने कहा कि उन्हें पहली बार इतने बड़े कला आयोजन को निकट से देखने और कलाकारों से मिलने का अवसर मिला, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न एवं उत्साहित हैं। उन्होंने मुक्त कंठ से कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं कलात्मक आयोजन समय-समय पर सोसाइटी में होते रहने चाहिए, ताकि बच्चों, युवाओं और महिलाओं को कला एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता रहे। उद्बोधन के उपरांत चित्रकला शिविर का शुभारंभ हुआ, जिसमें कलाकारों ने अपने-अपने कैनवास पर रामायण के विभिन्न प्रेरक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों का सजीव चित्रांकन प्रारंभ किया। उपस्थित अतिथियों, कलाकारों एवं कला प्रेमियों ने इस आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे वाराणसी की सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन बताया। कार्यक्रम में स्वागत सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. कल्पना ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सोसाइटी के उपाध्यक्ष एवं कलाकार पंकज कुमार शर्मा ने किया।
