इस्लामाबाद। पाकिस्तान में संविधान संशोधन को लेकर पाक सेना और राष्ट्रपति के बीच टशन बढ़ गया है। यह दाव पाकिस्तान के मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के प्रमुख अल्ताफ हुसैन (एमक्यूएम) ने किया है। इस दावे से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। हुसैन ने कहा सेना और राष्ट्रपति के बीच कुछ भी सही नहीं हैं।
उनके मुताबिक सेना और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच खामोश जंग’ चल रही है। नए सूबे बनाने की जिद और 28वें संविधान संशोधन का विवाद धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हुसैन ने वीडियो संदेश में दावा किया है कि सेना और राष्ट्रपति जरदारी के रिश्ते इस वक्त सबसे नाजुक मोड़ पर हैं, एक ऐसा खेल चल रहा है जो किसी भी वक्त पाकिस्तान की नागरिक सरकार को उखाड़ फेंकेगा। इस बार मुद्दा सिर्फ कुर्सी बचाने का नहीं है, बल्कि पूरे देश का नक्शा और संविधान बदलने की फौजी सनक का है। उन्होंने पूछा कि जब पाकिस्तान में इतने बड़े पैमाने पर संविधान और सीमाओं को बदलने की तैयारी चल रही है, तब देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हफ्तों से विदेश में क्यों बैठे हैं। अल्ताफ हुसैन का दावा है कि हाल ही में लंदन में पाकिस्तान के संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने जरदारी से मुलाकात की। इस गुप्त बैठक में गृह मंत्री ने सेना का अहम मैसेज उन तक पहुंचाया। हुसैन का आरोप है कि पाकिस्तान पीपुल्स सिंध प्रांत में जानबूझकर नफरत और तनाव का माहौल पैदा कर रही है। उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर से सीधे गुजारिश की है कि वो मुहाजिरों की सुरक्षा और उनकी जायज चिंताओं को अनदेखा न करें। इसके अलावा 28वें संविधान संशोधन के जरिए नए सूबे बनाने की बिसात बिछाई जा रही है। इससे पहले भी 26वें और 27वें संशोधनों को पास कराने के लिए राजनीतिक दलों ने आपस में सौदेबाजी की थी। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और राष्ट्रपति बीच बढ़ा ये टकराव देश को एक बड़े संवैधानिक दलदल में धकेल रहा है। इससे देश के लोकतंत्र को खतरा है।
