विद्यालय में प्रवेश केवल शिक्षा की शुरुआत नहीं, जीवन का महत्वपूर्ण चरण है : प्राचार्य वर्मा
वाराणसी, राजेंद्र तिवारी। केंद्रीय विद्यालय 39 जीटीसी में कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले नन्हे विद्यार्थियों का शिक्षकों ने स्वागत किया। प्राचार्य डॉ. चंद्र भूषण प्रकाश वर्मा ने स्वयं नवप्रवेशी छात्रों और उनके अभिभावकों का स्वागत करते हुए उन्हें विद्यालय परिवार का हिस्सा बनने पर शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई। जिसके बाद ‘प्रवेशोत्सव’ और ‘अभिभावक अभिविन्यास’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय के शिक्षकों ने बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण एवं प्रेरणादायक शैक्षिक वातावरण का भरोसा दिलाया। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर झलकती उत्सुकता और अभिभावकों की संतुष्टि इस आयोजन की सफलता को स्पष्ट कर रही थी।
प्राचार्य डॉ. वर्मा ने कहा कि विद्यालय में प्रवेश केवल शिक्षा की शुरुआत नहीं, बल्कि जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का आरंभ है। उन्होंने कहा कि कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले ये नन्हे विद्यार्थी आज जिस दहलीज पर खड़े हैं, वहीं से उनके भविष्य की दिशा तय होगी। हमारा प्रयास रहेगा कि हम इन्हें केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि इनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल रटने की बजाय समझने, सोचने और सृजन करने की क्षमता विकसित करना अधिक आवश्यक है। नई शिक्षा नीति के तहत ‘विद्या प्रवेश’ कार्यक्रम बच्चों को स्कूल के वातावरण से सहज रूप से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए बच्चे खेल-खेल में सीखते हैं, जिससे उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि स्वतः विकसित होती है। इस दौरान प्राचार्य वर्मा ने अभिभावकों की भूमिका पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक साझा प्रयास है, जिसमें अभिभावकों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि घर और स्कूल के बीच समन्वय बना रहेगा, तो बच्चे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझकर उन्हें प्रोत्साहित करें। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों को पठन-पाठन की प्रक्रिया, ‘विद्या प्रवेश’ मॉड्यूल, पाठ्यपुस्तकों की उपयोगिता और विद्यालय की शिक्षण पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। नवप्रवेशी विद्यार्थियों को इस अवसर पर नि:शुल्क ‘विद्या प्रवेश’ बुकलेट, चॉकलेट, स्वागत कार्ड और लेखन सामग्री प्रदान की गई। इन उपहारों को पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। इस मौके पर उपप्राचार्य अभिषेक त्रिपाठी ने भी कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को एक अच्छा नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, समय की पाबंदी और नैतिक मूल्यों का विकास प्रारंभिक शिक्षा से ही शुरू हो जाता है। इस मौके पर मुख्य अध्यापिका शालिनी मिश्रा, खेल शिक्षक मनिंद्र सिंह, पंकज शर्मा, अविनाश वाणी, मोहित, दीक्षा विश्वकर्मा , भरत शुक्ला एवं दिव्य प्रकाश सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
