डिजिटल इंडिया और पर्सनल फाइनेंशियल प्लानिंग पर गहन मंथन, नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए अवसरों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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आज दिनांक 25 अप्रैल 2026 को राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के वाणिज्य विभाग द्वारा “Digital India & Personal Financial Planning: Unlocking Opportunities for the Next Generation Investors” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम में डिजिटल इंडिया के परिवर्तित परिदृश्य, व्यक्तिगत वित्तीय नियोजन, निवेश संस्कृति, फिनटेक नवाचार, साइबर सुरक्षा, वित्तीय अनुशासन तथा नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए उपलब्ध अवसरों पर व्यापक और गहन विमर्श किया गया।
संगोष्ठी अध्यक्ष एवं प्राचार्य प्रो० आभा शर्मा ने कहा कि डिजिटल इंडिया केवल तकनीकी परिवर्तन का अभियान नहीं, बल्कि आर्थिक सहभागिता, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को पारंपरिक बचत के साथ-साथ डिजिटल वित्तीय साधनों, निवेश विकल्पों, जोखिम प्रबंधन तथा वित्तीय नियोजन की समुचित समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को व्यवहारिक और जीवनोपयोगी कौशल से सशक्त बनाना भी है। इस प्रकार की संगोष्ठियां विद्यार्थियों को अकादमिक अध्ययन के साथ व्यवहारिक वित्तीय समझ प्रदान करती हैं।
संगोष्ठी संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ० दिनेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्सनल फाइनेंशियल प्लानिंग वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण, नियमित बचत, निवेश विविधीकरण, जोखिम नियंत्रण, कर नियोजन तथा दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य निर्धारण जैसे आयाम वित्तीय स्थिरता के आधार हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने निवेश की पहुंच को सरल बनाया है, किंतु इसके लिए सूचित निर्णय क्षमता और जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को ज्ञान आधारित निवेश दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजक सचिव डॉ० फकीर सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी को वित्तीय अनुशासन के साथ डिजिटल वित्तीय व्यवहार की समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि अनियोजित व्यय, उपभोक्तावादी प्रवृत्ति तथा तात्कालिक लाभ की सोच से बचते हुए दीर्घकालिक वित्तीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने आपातकालीन निधि निर्माण, बीमा कवरेज, नियमित निवेश तथा डिजिटल लेन-देन में सुरक्षा उपायों को वित्तीय सशक्तिकरण का आधार बताया।


मुख्य अतिथि प्रो० बी० सी० मेलकानी ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि डिजिटल इंडिया ने निवेश और वित्तीय सहभागिता के अभूतपूर्व अवसर सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि युवा निवेशकों के लिए वित्तीय निर्णय क्षमता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की समझ तथा निवेश अनुशासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने 50:30:20 मॉडल को वित्तीय प्रबंधन का प्रभावी सूत्र बताते हुए आय का संतुलित उपयोग, बचत और निवेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने म्यूचुअल फंड, बीमा, सेवानिवृत्ति योजना, डिजिटल भुगतान प्रणाली, पैन कार्ड, फिनटेक प्लेटफॉर्म और निवेश के आधुनिक साधनों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वित्तीय योजना के अभाव में संसाधनों का प्रभावी उपयोग संभव नहीं है।
प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता प्रो० पी० के० पाठक ने कहा कि निवेश केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया है। उन्होंने निवेश विकल्पों, जोखिम-प्रतिफल संतुलन, दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण तथा वित्तीय व्यवहार में अनुशासन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था में अपनाई गई वित्तीय आदतें भविष्य की आर्थिक स्थिरता निर्धारित करती हैं। उन्होंने छात्राओं को निवेश से पूर्व सूचनात्मक अध्ययन और विवेकपूर्ण निर्णय की सलाह दी।
द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता डॉ० मनोज भट्ट ने डिजिटल युग में निवेशक जागरूकता, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फ्रॉड से बचाव तथा तकनीक आधारित वित्तीय अवसरों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल निवेश के बढ़ते परिदृश्य में सुरक्षा, पारदर्शिता और वित्तीय नैतिकता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं को तकनीक आधारित अवसरों का लाभ उठाते हुए जिम्मेदार निवेश व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
संगोष्ठी के दौरान डिजिटल इंडिया के संदर्भ में वित्तीय समावेशन, पर्सनल फाइनेंशियल प्लानिंग, फिनटेक, डिजिटल भुगतान, निवेश अवसर, बीमा, सेवानिवृत्ति योजना, आपातकालीन कोष, वित्तीय सुरक्षा तथा नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विशेषज्ञों ने समाधान प्रस्तुत किया तथा संवादात्मक सत्र के माध्यम से विषय को व्यवहारिक दृष्टि से स्पष्ट किया गया।
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि वित्तीय साक्षरता केवल व्यक्तिगत समृद्धि का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त समाज निर्माण का आधार भी है। संगोष्ठी में छात्राओं की सक्रिय सहभागिता, विषय के प्रति उत्साह और संवादात्मक उपस्थिति की सराहना करते हुए इसे ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं समसामयिक विमर्श बताया गया।
इस अवसर पर डॉ० रितुराज पंत, डॉ० दिनेश चंद्रा, डॉ० मंजरी चौधरी, डॉ० रुचि रजवार आदि उपस्थित रहे।

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