अमेरिका और ईरान में फिर शुरू हुई भीषण गोलीबारी

अंतरराष्ट्रीय

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार को जुलाई के बाद सबसे बड़ा सैन्य टकराव सामने आया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के दक्षिणी समुद्री तट पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, मंगलवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की वायु रक्षा प्रणालियों, रडार, समुद्री संपत्तियों और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास की गई, जहां ईरान ने जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की धमकी दी है। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक स्थित अमेरिकी संपत्तियों पर हमला किया। ईरान का कहना है कि उसका उद्देश्य मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना को बाहर निकालना है। ईरान ने दावा किया है कि जॉर्डन, कुवैत के अली अल सालेम वायु ठिकाने और इराक के एरबिल में स्थित ठिकानों पर हमले करके अमेरिकी बलों को नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने किसी भी सैन्यकर्मी के मारे जाने से इनकार किया है। कुवैत, बहरीन और कतर ने इन हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई है और ईरान को इसके परिणामों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 12 लोगों की जान गई है। सिरीक शहर में एक शादी के कार्यक्रम पर हुए हमले में एक चार साल के बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। उधर, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों के बारूदी सुरंग से टकराने की बात भी कही है। इस भीषण गोलाबारी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट आई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कार्रवाई को सफल बताते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण मजबूत हुआ है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच वार्ता पूरी तरह से रुकी हुई है।

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