केंद्र ने स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं का हमेशा निदान किया : शाह

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नई दिल्ली, देव कुमार। मोदी सरकार ने बीते 11 सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं का हमेशा निदान किया है। बेंगलुरु में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को यह बातें कहीं। उन्होंन जनता के सामने आने वाले स्वास्थ्य मुद्दों पर ध्यान देने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समग्र दृष्टिकोण के लिए उनकी सराहना की। शाह ने अदिचुन्चानागिरी विश्वविद्यालय (एसीयू) के बेंगलुरु परिसर का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा, हमारे नेता और प्रधानमंत्री मोदी ने कई साल पहले गुजरात में कहा था कि गरीबी का सबसे बड़ा मुद्दा बीमारी और इलाज का खर्च है। प्रशासन को गरीबों की बीमारी के इलाज का इंतजाम करना होता है। मैं आज गर्व के साथ कह सकता हूं कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही 60 करोड़ गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराकर इस सपने को पूरा किया है।
उन्होंने कहा, एक तरह से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी नागरिक मां के गर्भ से लेकर पूरा नागरिक बनने तक बीमार नहीं पड़े। यदि व्यक्ति अस्वस्थ हो जाता है तो वह बिना अधिक कीमत चुकाए इलाज कराए। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने स्वास्थ्य की समस्या पर समग्र दृष्टिकोण से ध्यान दिया है, जिसमें फिट इंडिया मूवमेंट, योग दिवस, मिशन इंद्रधनुष और पोषण अभियान, आयुष्मान भारत, भारतीय जन औषधि परियोजना तथा करीब 12 करोड़ घरों में शौचालय बनाने जैसी पहल शामिल हैं। शाह ने कहा कि देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में देश में सात एम्स थे, आज 23 एम्स हैं, वहीं मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 780 हो गई है। यानी बीते 11 वर्ष में 393 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए। उन्होंने कहा, तब (2014 में) 51,000 एमबीबीएस सीट थीं, आज इनकी संख्या 1,18,000 है, वहीं पीजी सीट की संख्या पहले 31,000 थी, जो आज 74,000 है।
वहीं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र में वृद्धि असमान हो रही है। सरकार इसे एकसमान रूप देने की तैयारी कर रही है। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र केवल देश के पश्चिमी भागों में ही स्थिर रहा, जबकि उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में यह कमजोर रहा। सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र की वृद्धि को एकसमान रूप देना है। शाह ने कहा कि जीडीपी देश की वृद्धि का एकमात्र मापदंड नहीं है। सहकारी क्षेत्र कम पूंजी में अधिक लाभ और रोजगार के अवसर प्रदान करके वृद्धि एवं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि दो लाख नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) बनाई जाएंगी और उन्हें बहुआयामी स्वरूप भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा, हम अगले 10 वर्षों में निर्यात, जैविक खाद्य और बीजों में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं।

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