कैलिफोर्निया। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं, जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होना, दिमाग और आंखों की नसें सूजना शामिल है। अब एक नए शोध में दावा किया गया कि अंतरिक्ष यात्रा के कारण इंसान दस गुना तेजी से बूढ़ा होता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्टेम कोशिकाओं पर अध्ययन कर जानकारी जुटाई है। सैनफोर्ड स्टेम सेल संस्थान की निदेशक डॉ. कैट्रियोना जैमीसन ने बताया कि स्टेम कोशिकाएं अंतरिक्ष उड़ान के दौरान होने वाले तनाव में भी उम्र बढ़ने के लक्षण दिखाती हैं। उनके मुताबिक, स्टेम कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया जमीन की तुलना में अंतरिक्ष में दस गुना तेजी से होती है। दरअसल, स्टेम कोशिकाएं शरीर को मजबूती देने का काम करती हैं। ये कई टिशू (उत्तक) में विकसित हो सकती हैं और खुद अलग अधिक स्टेम कोशिकाएं बना सकती हैं। इस बारे में शोधकर्ता जैमीसन ने कहा, अंतरिक्ष यात्रा के दौरान स्टेम कोशिका की तेजी से उम्र बढ़ना चिंताजनक है। क्योंकि इससे शरीर में मौजूद ऊतकों और अंगों की मरम्मत करने की प्राकृतिक क्षमता कम हो जाती है और कैंसर, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने दान किए गए बैनमेरो से स्टेम सेल एकत्र किए और नमूनों को दो बॉक्स में रखा गया। स्पेसएक्स के भेजे गए यान से एक बॉक्स को अंतरिक्ष में और दूसरे को पृथ्वी पर रखा गया। करीब 45 दिन बाद दोनों स्टेम सेल का परीक्षण किया गया तो पता चला कि उनकी उम्र बढ़ने की गति सबसे तेज रही। बता दें, इससे पहले नासा द्वारा जुड़वां अंतरिक्ष यात्रियों मार्क स्कॉट केली पर किए गए अध्ययन में दोनों पुरुषों में उम्र बढ़ने के संकेतों का पता लगा था, जबकि मार्क पृथ्वी पर रहे और स्कॉट ने अंतरिक्ष में 340 दिन बिताए थे। इसमें पता लगा था कि स्कॉट के शरीर में परिवर्तन यात्रा समाप्त होने के छह महीने बाद भी बने रहे।
