क्या बिहार में मृतकों को मतदाता बनने दें: मुख्य चुनाव आयुक्त

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नई दिल्ली । बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने गुरुवार को पहली बार अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कई सवाल उठाए हैं। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने पूछा, क्या आयोग किसी प्रभाव में आकर मृत, स्थायी रूप से पलायन कर चुके या कई जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज लोगों के नाम सूची में शामिल करने की अनुमति दे सकता है?
उनकी यह टिप्पणी विपक्षी दलों द्वारा बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर आयोग पर बढ़ते हमलों के बीच आई है। विपक्ष का दावा है कि इस कदम से करोड़ों पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, क्या निर्वाचन आयोग द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जा रही शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव और मजबूत लोकतंत्र की नींव नहीं है? उन्होंने कहा कि पहले बिहार में और बाद में पूरे देश में अपात्र लोगों को वोट देने की अनुमति देना संविधान के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इन सवालों पर, किसी न किसी दिन, हम सभी और भारत के सभी नागरिकों को राजनीतिक विचारधाराओं से परे जाकर गहराई से सोचना होगा। बता दें कि बिहार में मतदाता सूची के लिए जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जांच में निर्वाचन अधिकारियों ने अब तक पाया है कि 52 लाख से अधिक मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं थे और 18 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। आयोग ने बताया है कि एसआईआर के निर्देशों के अनुसार, किसी भी मतदाता या किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को 1 अगस्त से 1 सितंबर तक एक महीने का समय मिलेगा ताकि वे निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और पार्टियों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) द्वारा छूट गए पात्र मतदाता का नाम शामिल करवा सकें। राहुल गांधी ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बारे में सवाल किए जाने पर कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। चुनाव आयोग, भारत के चुनाव आयोग की तरह काम नहीं कर रहा है। एसआईआर पर चुनाव आयोग के बयान को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से बकवास है। असल हकीकत यह है कि भारत का चुनाव आयोग अपना काम नहीं कर रहा है।

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