नई दिल्ली,देव कुमार। एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने मंगलवार रात कविनगर में छापेमारी कर अवैध रूप से चल रहे दूतावास का पर्दाफाश किया। इस वेस्ट आर्कटिक दूतावास से एक फर्जी राजदूत को भी गिरफ्तार किया गया। एसटीएफ के मुताबिक आरोपी कंपनियों और लोगों को विदेश में काम दिलाने के नाम पर दलाली करता था और शैल कंपनियों के माध्यम से हवाला का रैकेट चलाता था।
एसटीएफ के एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि कविनगर में फर्जी दूतावास संचालित होने की सूचना मिली थी। केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क करने पर पता चला कि विदेश मंत्रालय की अनुमति के बिना दूतावास नहीं चलाया जा सकता। यह भारत की संप्रभुता के विरूद्ध है। इसके बाद एसटीएफ नोएडा से एएसपी राजकुमार मिश्र और डीएसपी नवेंदु कुमार के पर्यवेक्षण में निरीक्षक सचिन कुमार और एसआई सनत कुमार की टीम गठित की गई।
टीम ने मंगलवार रात कोठी नंबर केबी-35 पर छापेमारी की तो वहां अवैध रूप से दूतावास चलता मिला। मौके से गिरफ्तार कविनगर निवासी हर्षवर्धन जैन किराये पर कोठी लेकर वहां वेस्ट आर्कटिक दूतावास चला रहा था। हर्षवर्धन जैन खुद को वेस्ट आर्कटिका, सर्बोगा, पॉलविया और लोडोनिया आदि स्वयंभू देशों का काउंसलर और कॉन्सुल एंबेसडर (वाणिज्य दूत) बताता था। वर्ष 2012 में भी हर्षवर्धन जैन को सेटेलाइट फोन के साथ गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ कविनगर थाने में केस दर्ज किया गया था। विदेश मंत्रालय, स्वयंभू देशों की मुहर बरामद : एसटीएफ ने कोठी से डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगी चार गाड़ियां, 44 लाख 70 हजार रुपये, कई देशों की मुद्रा, विदेश मंत्रालय की मुहर लगे फर्जी दस्तावेज, डिप्लोमेटिक गाड़ियों की 20 जोड़ी नंबर प्लेट, स्वयंभू देशों के 12 पासपोर्ट, हर्षवर्धन जैन के दो पैन कार्ड, विभिन्न स्वघोषित देशों और कंपनियों की 34 मुहर, 12 कीमती घड़ियां, एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, वोटर आईकार्ड बरामद किए। बिना अधिकार पत्र के बनाए गए दो प्रेस कार्ड भी जब्त किए गए हैं। एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक विदेश में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने माइक्रोनेशन के नाम पर स्वयंभू देश घोषित कर रखे हैं, लेकिन इन देशों को कानूनी तौर पर मान्यता नहीं है। स्वयंभू देश घोषित करने वाले लोग हर सरकार और प्राइवेट कंपनियों में दलाली का काम करते हैं। हर्षवर्धन जैन ने सबोर्गा और वेस्ट आर्कटिका के लोगों से मिलकर भारत में उनका निजी दूतावास बना लिया। लोगों को झांसे में लेने के लिए उसने फेसबुक अकाउंट तथा दफ्तर में भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के एडिट किए फोटो लगाए हुए थे। गाजियाबाद में फर्जी दूतावास संचालित करने वाले हर्षवर्धन जैन ने इटली और मधुबनी के गांवों के नाम पर फर्जी देश बनाकर उनका दूतावास बना रखा था। यह दूतावास 11 वर्षों से संचालित हो रहा था। एसटीएफ के अनुसार इन सभी काल्पनिक देशों के बारे में इंटरनेट पर भी कोई जानकारी नहीं है। गूगल करने पर सर्बोगा के नाम से इटली का एक गांव आता है और माइक्रोनेशन है। पॉलविया खोजने पर कुछ लोगों के नाम का टाइटल आता है। वहीं, लोडोनिया शब्द सर्च किया गया तो बिहार में मधुबनी स्थित एक गांव का नाम और वेस्ट आर्कटिका सर्च करने पर एक माइक्रोनेशन का नाम आता है। यह दक्षिणी कैलिफोर्निया स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में कार्य करता है। एसटीएफ के अनुसार, फर्जी दूतावास वर्ष 2013-14 से कविनगर में संचालित हो रहा था। शुरू में इसे चोरी-छिपे चलाया गया, लेकिन पिछले कुछ समय से इसकी गतिविधियां बढ़ गईं। यहां डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट लगी गाड़ियों की आवाजाही अधिक थी और कोठी के बाहर इन्हें खड़ी कर दिखावा किया जाता था। लोगों को जब शक हुआ तो इसकी शिकायत एसटीएफ तक पहुंची। नोएडा एसटीएफ ने छापा मारने से पहले एक रिपोर्ट केंद्रीय एजेंसियों को दी थी। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद कार्रवाई की गई। एसटीएफ के अनुसार, फर्जी दूतावास का मुख्य धंधा हवाला कारोबार और विदेश में लाइजनिंग के जरिये बड़े काम कराना था। आरोपी विदेश में सरकारी ठेके दिलाने के नाम पर भी ठगी करता। गिरफ्तार हर्षवर्धन कभी तांत्रिक चंद्रास्वामी का करीबी था। वह अंतरराष्ट्रीय आर्म्स डीलर अदनान खगोशी का भी करीबी था। उनके लिए वह विदेश में हवाला का कारोबार करता था। हवाला कारोबार के लिए ही पूरा सेटअप बनाया गया था।
