ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत तीन को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी- बीडी) ने सोमवार को मौत की सजा सुनाई। पिछले साल जुलाई में हसीना सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों’ के लिए अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में सजा सुनाई। वहीं हसीना ने कहा ये फैसला धांधलीपूर्ण न्यायाधिकरण ने दिया है जिसका गठन एक गैर निर्वाचित सरकार ने किया जिसे लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है। फैसला राजनीति से प्रेरित है। मौजूदा सरकार द्वारा मृत्युदंड की मांग, अंतरिम सरकार के भीतर चरमपंथी लोगों के निर्लज्ज और जानलेवा इरादे को उजागर करती है। ये एक शक्तिशाली सियासी ताकत अवामी लीग को खत्म करना चाहते हैं। हसीना ने ऑडियो संदेश में समर्थकों से कहा कि वे चिंता नहीं करें। ये सिर्फ समय की बात है। संदेश लीग ने फेसबुक पर पोस्ट किया है।
अदालत ने हसीना के अलावा पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई है। वहीं पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल- मामूल को पांच साल कैद की सजा हुई है। आईसीटी- बीडी के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कड़ी सुरक्षा में फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह यह साबित कर दिया कि पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के पीछे पूर्व प्रधानमंत्री हसीना का ही हाथ था। अदालत ने कहा कि हसीना ने भड़काऊ भाषण देकर हिंसा को भड़काने का काम किया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला करने की साजिश रचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं हसीना ने प्रदर्शनकारियों पर हमले के लिए हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। अदालत के फैसले के बाद बांग्लादेश ने भारत से हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को सौंपने की मांग की है। ढाका ने बयान जारी कर कहा कि भारत प्रत्यर्पण संधि के तहत ऐसा करने के लिए बाध्य है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से करीब एक माह तक चले आंदोलन के दौरान करीब 1400 लोग मारे गए थे। हसीना को निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग का आदेश देने, भड़काऊ बयान देने और ढाका तथा आसपास के इलाकों में कई छात्रों की हत्या के लिए अभियान चलाने की अनुमति देने के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। 78 वर्षीय हसीना पिछले साल पांच अगस्त को सरकार के गिरने के बाद से भारत में हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था। सरकारी अधिवक्ता गाजी एमएच तमीम ने बताया कि सरकार ने अदालत से हसीना को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी। हसीना की संपत्ति जबत कर पीड़ित परिवारों में बांटने की अपील की थी। मालूम हो आईसीटी- बीडी के नियमों के अनुसार हसीना मामले में अपील नहीं कर सकती थी। हसीना के पास सिर्फ आत्मसर्मपण करने का ही विकल्प था। नियमों के अनुसार अदालत के फैसले के तीस दिन के भीतर हसीना को गिरफ्तार करने का प्रावधान है। अब बांग्लादेश इस मामले में क्या करता है ये देखना होगा। हसीना के खिलाफ फैसले पर बांग्लादेश में सोमवार को भी हिंसा का दौर जारी रहा। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मो. युनूस के घर के बाहर धमाके की सूचना है। भीड़ ने युनूस के घर के पास स्थित थाने में क्रूड बम से हमला किया। इससे थाने में खड़े वाहनों में आग लग गई और कई वाहन जलकर खाक हो गए। ढाका के आसपास के क्षेत्रों में आगजनी और विरोध प्रदर्शन से जन जीवन ठप रहा। लोग सड़कों पर उतर अदालत के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इस दौरान चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात रहे। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) ने सुरक्षाबलों को हिंसा फैलाने या गोली चलाने वालों को गोली मारने का आदेश दिया है। आयुक्त एसएम सजात अली ने रविवार को कहा था कि अगर कोई क्रूड बम से किसी को मारने की कोशिश करता है तो उसे तुरंत गोली मार दी जाए। फैसले के बाद पूरे बांग्लादेश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षाबल चप्पे-चप्पे पर तैनात है। सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है। सुरक्षाबलों की कई टीमें हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
