नई दिल्ली, नीलू सिंह। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कौशल विकास से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि जब भी उन्हें समान अवसर मिलते हैं, तो वे पुरुषों जितना ही अच्छा या उनसे बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
रक्षा मंत्री ने यह बात शनिवार को गुजरात के वलसाड में ‘श्रीमद् राजचंद्र सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का उद्घाटन करते हुए कही। सिंह ने कहा, ‘मेरा मानना है कि जो महिलाएं यहां काम करेंगी, वे न केवल सशक्त होंगी, बल्कि आत्मनिर्भर भी बनेंगी और उन्हें अपने तरीके से आध्यात्मिक चिंतन में शामिल होने का अवसर और समय मिलेगा।’ कहा कि यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिसका प्रबंधन पूरी तरह से ग्रामीण महिलाएं करेंगी, महिला उद्यमिता को और मजबूत करेगा और महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करेगा।
इस दौरान रक्षा मंत्री ने केंद्र में कार्यरत जनजातीय महिलाओं से मुलाकात की। कहा कि वह उनके चेहरों पर मुस्कुराहट देखकर भावुक हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केंद्र महिला सशक्तिकरण के आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को बढ़ावा दे रहा है। एक बार जब इस जगह के उत्पाद वैश्विक बाजार में पहुंचेंगे, तो यह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रोत्साहित करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली इस सेंटर का शिलान्यास किया था। अब उन्हें इसके उद्घाटन का सौभाग्य मिला है। कहा कि गुजरात की ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं को सशक्त करने में इस केंद्र की बड़ी भूमिका है। यहां उन्हें पारंपरिक कलाओं से लेकर एआई तक का प्रशिक्षण देकर कौशल, आजीविका व नेतृत्व विकास में मदद मिलेगी। श्रीमद् राजचंद्र एक जैन संत, कवि, रहस्यवादी, दार्शनिक और 19वीं सदी के आखिर के एक प्रमुख समाज सुधारक थे। उनके भक्त गुरुदेव श्री राकेशजी ने श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर, एक आध्यात्मिक संगठन की स्थापना की। रक्षा मंत्री ने इसे सुखद संयोग बताया कि इसी वर्ष श्रीमद् राजचंद्र के धरमपुर आगमन को 125 साल पूरे हुए हैं और वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के भी 100 साल पूरे हुए हैं। कहा कि दोनों परंपराएं भारत की शाश्वत संस्कृति का प्रतीक हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जैन परंपरा और विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया है। कहा कि 20 से अधिक पूजनीय तीर्थंकरों की चोरी हो चुकी मूर्तियों को बीते कुछ वर्षों में विदेशों से भारत वापस लाया गया है। पिछले साल, हमने ‘प्राकृत’ भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। कहा कि जैन धर्म का ‘अनेकांतवाद’ का दर्शन आपसी सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग है।
