देहरादून, गौरव जोशी। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सोमवार रात और मंगलवार को हुई भारी बारिश और भूस्खलन से चौतरफा तबाही मच गई। बारिश और भूस्खलन से उत्तराखंड में देहरादून में 13, चमोली में एक, कुमाऊं में दो लोगों की मौत हो गई। वहीं हिमाचल में चार लोगों की जान चली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुबह सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर आपदा की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि केंद्र सरकार आपदा की इस घड़ी में राज्य के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य में राहत कार्य और तेज़ी से संचालित होंगे।
उत्तराखंड में सबसे ज्यादा तबाही देहरादून जिले में हुई है। विकासनगर के सभावाला में ट्रैक्टर ट्रॉली से आसन नदी पार कर रहे 14 मजदूर तेज बहाव में बह गए। इनमें से सात के शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं देहरादून से लगे कस्बों में नालों के उफान पर आने से रेस्तरां संचालक समेत छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि 16 लोग लापता हैं। चमोली जिले के निजमुला घाटी के एक गांव में जंगल में घास लेने गई महिला की चट्टान से छिटके बोल्डर की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं,कुमाऊं में भारी बारिश और भूस्खलन से अलग-अलग स्थानों पर एक महिला समेत दो लोगों की जान चली गई। उधर, हिमाचल प्रदेश में सोमवार देर रात हुई भारी बारिश से कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। मंडी जिले के निहरी क्षेत्र में मंगलवार सुबह भूस्खलन से एक मकान ढह गया। इसकी चपेट में आने से परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो को सुरक्षित निकाल लिया गया। वहीं, दरंग के सुमा नाले में दो चचेरे भाई बह गए। एक का शव बरामद कर दिया गया है, जबकि दूसरा अभी लापता है।
वहीं, मंडी के धर्मपुर में भी भारी बारिश के बाद सोन खड्ड (नाले) में खूब तबाही मचाई। तेज बारिश के बाद नाले में बाढ़ से बस स्टैंड में खड़ीं कई सरकारी बसें पानी के तेज बहाव में बहीं। दुकानों में पानी और मलबा घुस गया। इससे 10 बसों और 15 से ज्यादा गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है। उधर शिमला के हिमलैंड, बीसीएस और पांजली लैंडस्लाइड में 20 से ज्यादा गाड़ियां मलबे में दब गईं। हिमलैंड में भूस्खलन के बाद शिमला की लाइफ लाइन कहे जाने वाला सर्कुलर रोड सुबह 6 घंटे तक बंद रहा।
बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर में ट्रैक्टर ट्रॉली से आसन नदी पार कर रहे 14 मजदूर तेज बहाव में बह गए। हादसे में सात की मौत हो गई, जबकि सात लापता हैं। मृतकों की पहचान 65 वर्षीय सोमवती निवासी मुडियाजैन मुरादाबाद, 30 वर्षीय रीना सोमवती निवासी मुडियाजैन, मुरादाबाद, 30 वर्षीय फरमान निवासी परवल, 60 वर्षीय वासी मुडियाजैन थाना सोनकपुर तहसील बिलारी, जिला मुरादाबाद, 30 वर्षीय मदन निवासी मुडियाजैन थाना सोनकपुर तहसील बिलारी जिला मुरादाबाद, 50 वर्षीय नरेश निवासी मुडियाजैन थाना सोनकपुर तहसील बिलारी जिला मुरादाबाद, 30 वर्षीय किरण निवासी मुडियाजैन थाना सोनकपुर तहसील बिलारी जिला मुरादाबाद के रूप में हुई है। वहीं देहरादून में सोमवार रात करीब दस बजे बाद बारिश ने कहर बरपाना शुरू किया। सहस्त्रधारा के गांव मजाड़ा और कारलीगाढ़ में अतिवृष्टि के कारण पानी के साथ आया मलबा गांवों में घुस गया। इसमें तीन लोग दब गए, जबकि एक नेपाली युवक बह गया। मलबे में तीन लोगों में से दो की ही पहचान हो पाई है। इनकी पहचान अंकित रावत निवासी मजाड़ा और विरेंद्र सिंह निवासी बिहार के रूप में हुई है। दोनों की उम्र 20-22 के करीब है। चारों की खोजबीन जारी है। विकासनगर में आसन नदी में बहे लोगों में पांच अब भी लापता हैं। दो घायल अमन मुरादाबाद व अमरपाला को बचा लिया गया है। वहीं, राजपुर क्षेत्र में मलबे-पानी की चपेट में आने से रेस्तरां संचालक दंपति पानी में बह गए थे। उधर, जजरेड़ के पास स्कूटी सवार युवक के बोल्डर की चपेट में आने से मौत हो गई। दून में सितंबर माह में एक दिन में बारिश का 101 साल का रिकार्ड टूट गया। बताया जा रहा है कि दून में बारिश के कारण गई जगहों पर विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। इसके चलते सेलाकुई, लांगा रोड, विकासनगर, लालतप्पड़ आदि क्षेत्रों में करीब 400 उद्योगों में उत्पादन ठप हुआ। उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि इससे इंडस्ट्री को करीब 50 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर बिजली के पोल बह गए हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में भी संकट खड़ा हो सकता है।
