नई दिल्ली,देव। उपराष्ट्रपति डॉ. जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्होंने मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा के सभापति के रूप में सदन में मौजूद थे। धनखड़ उपराष्ट्रपति बनने से पूर्व पश्चिम बंगाल में राज्यपाल थे। अगस्त 2022 में उन्हें उपराष्ट्रपति बनाया गया था। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक बचा हुआ था।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपे अपने इस्तीफे में प्रधानमंत्री, मंत्रि परिषद और सभी सांसदों के सहयोग के लिए आभार प्रकट किया है। उप राष्ट्रपति जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में मौजूद रहे। उन्होंने सदन की कार्यवाही का संचालन भी किया। यह सही है कि 74 वर्षीय उप राष्ट्रपति दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं और इसी साल मार्च में एम्स में इलाज के लिए भर्ती भी हुए थे। तब उनकी एंजियोंप्लास्टी की गई थी। लेकिन उसके बाद वे ठीक थे। अप्रैल में भी वे सदन में आए थे। सोमवार को भी जब वे सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे तो किसी को ये अहसास नहीं था कि वे इतने बीमार हैं कि इस्तीफे दे सकते हैं।
राज्यसभा के सभापति के तौर पर कार्य करते हुए धनखड़ अपने मुखर स्वभाव के कारण हमेशा सुर्खियों में रहे। वे विपक्ष के निशाने पर रहे। नाराज विपक्ष ने पिछले साल उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था जो बाद में खारिज हो गया था। हालांकि विपक्ष के साथ उनके टकराव को लेकर सत्ता पक्ष भी सहज नहीं था। सत्ता पक्ष के लोग भी यह समझते थे कि वे ज्यादा बोलते हैं जिसके चलते कई मौकों पर हालात बेकाबू हो जाते थे। उप- राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने त्याग पत्र में लिखा- माननीय राष्ट्रपति जी .. सेहत को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह को मानने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अनुसार अपने पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत के राष्ट्रपति में गहरी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आपका समर्थन अडिग रहा, जिनके साथ मेरा कार्यकाल शांतिपूर्ण और बेहतरीन रहा। मैं प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है। माननीय सांसदों से मुझे जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला है, वह मेरी स्मृति में हमेशा रहेगा। उप राष्ट्रपति ने लिखा कि मैं इस बात के लिए आभारी हूं कि मुझे इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में जो अनुभव और ज्ञान मिला, वह अत्यंत मूल्यवान रहा। यह मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात रही है कि मैंने भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और इस परिवर्तनकारी युग में उसके तेज विकास को देखा और उसमें भागीदारी की। हमारे राष्ट्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण दौर में सेवा करना मेरे लिए सच्चे सम्मान की बात रही। आज जब मैं इस पद को छोड़ रहा हूं, मेरे दिल में भारत की उपलब्धियों और शानदार भविष्य के लिए गर्व और अटूट विश्वास है।
