Uttarakhand Youth Sent to Ukraine War by Russia

उत्तराखंड के युवक को रूस ने यूक्रेन वॉर में भेजा

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हल्द्वानी, गौरव जोशी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तराखंड के एक परिवार की चिंता और गहरी हो गई है। शक्तिफार्म क्षेत्र के गांव कुसमोठ निवासी राकेश कुमार इस साल अगस्त में स्टडी वीज़ा पर रूस गए थे, लेकिन अब उनके परिजनों का दावा है कि राकेश को रूसी सेना ने जबरन भर्ती कर लिया और युद्ध क्षेत्र यूक्रेन भेज दिया है। 30 अगस्त के बाद से उसका कोई संपर्क परिवार से नहीं हो पा रहा है। परेशान परिजनों ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से तत्काल हस्तक्षेप कर राकेश की सकुशल वापसी की गुहार लगाई है।
स्टडी वीज़ा से युद्धक्षेत्र तक का सफर
जानकारी के अनुसार, राकेश कुमार इसी साल 7-8 अगस्त को उच्च शिक्षा के उद्देश्य से रूस रवाना हुआ था। उसका दाखिला सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी में होना था। परिजनों का कहना है कि रूस पहुँचने के बाद राकेश ने फोन पर बताया कि उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। उसने खुलासा किया कि रूसी सेना ने उसका पासपोर्ट और सभी आधिकारिक दस्तावेज छीन लिए हैं। मोबाइल और लैपटॉप से आधिकारिक मेल डिलीट करवा दिए गए हैं और रूसी भाषा में लिखे कागज़ात पर जबरन हस्ताक्षर करवाकर उसे सेना की वर्दी थमा दी गई।
यूक्रेन भेजने से पहले दिलाई ट्रेनिंग
राकेश ने भाई दीपू को फोन पर बताया था कि उसे यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में मिलिट्री ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है और ट्रेनिंग पूरी होते ही उसे युद्ध में झोंक दिया जाएगा। राकेश ने खाने-पीने की दिक्कतों और असुरक्षा की स्थिति का भी जिक्र किया। परिजनों को भेजी गई तस्वीरों में वह रूसी सेना की वर्दी पहने दिखाई दिया।
30 अगस्त के बाद से गायब
राकेश का परिवार तब से भयभीत है जब 30 अगस्त के बाद उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। न तो फोन कॉल हो पा रही है और न ही किसी अन्य माध्यम से बातचीत।
परिजनों की गुहार
राकेश के भाई दीपू मौर्य ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि उनके भाई को जबरन युद्ध में झोंक दिया गया है और उसकी जान को गंभीर खतरा है। उन्होंने रूस में भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन को भी जानकारी दी है। दीपू का कहना है कि अब तक विदेश मंत्रालय से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
पारिवारिक स्थिति और बढ़ी चिंता
राकेश मूल रूप से बदायूं जिले के गांव पलिया गुजर का रहने वाला है। पिता राजबहादुर मौर्य हल्द्वानी के सुरेंद्रनगर स्थित सिडकुल की एक कंपनी में मजदूर हैं। मां सोनी और अन्य भाई-बहन भी गहरे सदमे में हैं। दीपू खुद शक्तिफार्म में अपने नाना के घर रहते हैं। परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत पहले से कमजोर है और अब इस संकट ने सबको तोड़ दिया है।
अंतरराष्ट्रीय संकट का मानवीय चेहरा
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब तक हजारों सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं। लेकिन उत्तराखंड से जुड़ा यह मामला युद्ध के बीच फंसे एक साधारण छात्र की भयावह स्थिति को सामने लाता है। यह सवाल भी उठाता है कि आखिर विदेशी छात्रों को रूस में पढ़ाई के बहाने कैसे सैन्य भर्ती के चंगुल में फंसाया जा रहा है।
परिजनों की अपील
परिवार बार-बार एक ही बात दोहरा रहा है—“हमारे बेटे को किसी भी हाल में सकुशल भारत वापस लाया जाए।”

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