नई दिल्ली, नीलू सिंह। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में अपने कार्यकाल का नौवां और कर्तव्य भवन में तैयार पहला आम बजट पेश किया। यह बजट वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 53.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का विशाल बजट प्रस्तावित किया है, जो देश की आर्थिक वृद्धि को नई गति देने, निवेश को प्रोत्साहित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दृष्टिकोण के तहत बजट में तीन प्रमुख कर्तव्यों पर विशेष जोर दिया गया है। पहला, आर्थिक स्थिरता के साथ तेज और समावेशी विकास को बढ़ावा देना; दूसरा, आम नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए उनकी क्षमताओं और कौशल का विकास करना; और तीसरा, ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र के तहत हर परिवार तक संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों की समान पहुंच सुनिश्चित करना।
इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में बजट में 2.91 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। यह सरकार की वित्तीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम सुधारों की घोषणा की गई है। कारोबार को आसान बनाने के उद्देश्य से गैरजरूरी प्रावधानों को हटाया गया है, ताकि उद्योग और निवेशकों को सरल, पारदर्शी और अनुकूल वातावरण मिल सके। इसके साथ ही दिव्यांगजन, कृषि, पूर्वोत्तर क्षेत्र, रोजगार सृजन, चिकित्सा सुविधाओं, महिला उद्यमिता, खेल, युवा वर्ग तथा लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए भी विशेष घोषणाएं की गई हैं। उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र के लिहाज से बजट को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लघु और मध्यम उद्योगों को ‘चैंपियन’ बनाने तथा सूक्ष्म उद्योगों को मजबूती देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता की घोषणा की गई है। साथ ही आत्मनिर्भर भारत कोष में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक गलियारों के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 20 विशेष पर्यटन स्थलों पर 10 हजार गाइड्स को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के तहत पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और ग्रामीण विद्युत निगम कॉरपोरेशन के पुनर्गठन की भी घोषणा की गई है। पूंजी बाजार से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किए गए हैं। फ्यूचर्स पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन के चयन पर एसटीटी की दर को क्रमशः 0.1 और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया गया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से बाजार में स्थिरता आएगी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगेगा। कुल मिलाकर, यह बजट आर्थिक सुधारों, सामाजिक समावेशन और दीर्घकालिक विकास के संतुलन का प्रयास करता नजर आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घोषित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह बजट भारत को 2047 तक एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
