जलाभिषेक का है वैज्ञानिक महत्व, नाड़ी शोधन का जीवन पर पड़ता है प्रभाव

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आज दिनांक 14 जून 2025 को महिला महाविद्यालय हल्द्वानी की नमामि गंगे इकाई द्वारा शहर के मुखानी क्षेत्र में अवस्थित खाटू श्याम बाबा मंदिर में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं योग को जनमानस से जोड़ने हेतु आयोजित संवाद एवं अभ्यास सत्र में नाड़ी शोधन प्राणायाम, शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा, तथा भारत की प्राचीन नदी सभ्यता जैसे विषयों पर विशेषज्ञ वक्ताओं ने विचार साझा किए।

योगाचार्य श्रीमती ज्योति चुफाल ने नाड़ी शोधन प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्राणायाम शरीर की इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों को शुद्ध करता है, जिससे मानसिक स्थिरता, तनाव में कमी और चित्त की एकाग्रता बढ़ती है। उन्होंने अभ्यास भी करवाया जिसमें दाएं-बाएं नासिका से क्रमशः श्वास लेना और छोड़ना शामिल था। उन्होंने यह भी बताया कि यह प्राचीन विधि हठयोग प्रदीपिका में वर्णित है और ध्यान साधना के लिए अनिवार्य आधार है।

वेदाचार्य श्री एस0बी0 पाठक ने शिवलिंग पर जल चढ़ाने के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक पक्ष को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह परंपरा समुद्र मंथन की घटना से जुड़ी है, जब भगवान शिव ने विषपान कर ब्रह्मांड की रक्षा की। जल चढ़ाकर हम उस तपन को शीतल करने की प्रतीकात्मक क्रिया करते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि शिवलिंग पर गिरती जलधारा सकारात्मक ध्वनि-तरंगें उत्पन्न करती है और यह ऊर्जा संतुलन का कार्य करती है।

इतिहास विषय के विशेषज्ञ डॉ0 सर्वेश भारती ने भारत की प्राचीन नदी सभ्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गंगा, सरस्वती, सिंधु जैसी नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं थीं, बल्कि संस्कृति, कृषि, व्यापार और धर्म का केंद्र थीं। उन्होंने कहा कि शिव जैसे देवता प्रायः नदियों के निकट प्रतिष्ठित हैं क्योंकि नदी और शिव – दोनों शुद्धि, संरक्षण और जीवन के प्रतीक हैं।

नोडल अधिकारी नमामि गंगे डॉ0 रितुराज पंत ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताया और कहा कि हमारा लक्ष्य भारतीय परंपराओं के भीतरी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष को जागरूकता के साथ प्रस्तुत करना है। संचालन मीनाक्षी पंत ने किया। इस अवसर पर प्राकृतिक चिकित्सक विमल पांडे,
योगाचार्य श्रीमती ज्योति चुफाल, वेदाचार्य एस0बी0 पाठक, इतिहासकार डॉ0 सर्वेश भारती, डॉ0 हिमानी, नम्रता पांडे , कंचन पाठक, यशोधर नाथ व अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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