पटना, राजेंद्र तिवारी।
एनडीए की ओर से जारी घोषणा पत्र पर महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने तंज कसा है। शुक्रवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि इतिहास में पहली बार किसी गठबंधन का घोषणा पत्र केवल 26 सेकेंड में जारी किया गया। आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को पता ही नहीं होगा कि घोषणा पत्र में क्या है। उन्हें बोलने से रोकने के लिए घोषणा पत्र के कार्यक्रम को जल्द से जल्द खत्म कर दिया गया। अजब-गजब का समारोह था।
तेजस्वी ने कहा कि एनडीए को बिहार के लिए संकल्प पत्र नहीं, बल्कि 14 करोड़ जनता के लिए माफी (सॉरी) पत्र लाना चाहिए। कोई निवेश नहीं, कोई कारखाना नहीं लगा। दरअसल, इनका मैनिफेस्टो, उनके बिहार से 20 साल से निरंतर किए जा रहे झूठ, धोखे और जुमलों का रिपोर्ट कार्ड है, और कुछ नहीं। हर बार इनका नया घोषणा पत्र आता है और उनके नए घोषणाओं को देखकर इनकी पिछली घोषणाएं पूछती हैं कि भैया हमारा क्या हुआ। हमें क्यों नहीं पूरा किया गया। पहले की घोषणाएं पूरी नहीं हुई और आनन-फानन में इस बार नया घोषणा पत्र जारी कर दिया गया। हर जिले में मेडिकल कॉलेज निर्माण का वादा किया गया है जबकि जहां बने हुए हैं वहां डॉक्टर ही नहीं हैं। इलाज नहीं हो रहा है। केवल खाका खड़ा कर दिया गया है। इन्होंने कहा है कि बच्चों को मिड डे मिल में पौष्टिक आहार देंगे। मतलब, यह मानते हैं कि अभी तक बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं दे रहे थे। ये तो एकदम मूलभूत बात थी न। यानी की आधारभूत जरूरतों को ये पूरा नहीं कर पाए। आज 20 साल के शासन के बाद एक जूनियर केजी वाला मैनिफेस्टो लेकर आए हैं।
उन्होंने कहा है कि एनडीए का कहना है कि स्कूलों का कायाकल्प करेंगे। यानी की बीस साल में इतना भी नहीं कर पाए। इन्हें बिहार की जनता से माफी मांगनी चाहिए। हर जिले में फैक्ट्री लगाने का वादा कर रहे हैं तो 20 साल से क्या कर रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह ने तो जमीन की कमी बता दी। बिहार की जनता करारा जवाब देगी। आम लोग बिहार की बेरोजगारी खत्म करना चाहते हैं। इस सरकार ने गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई बढ़ा दी। 94 लाख गरीब परिवार को आर्थिक न्याय कैसे देंगे, यह नहीं बताया। केवल नकल कर रहे हैं। हमसे पूछते थे कि कहां से पैसा लाएंगे, एनडीए को अब जवाब देना चाहिए कि वे अपनी घोषणाओं के लिए पैसा कहां से लाएंगे।
