शीतकाल के लिए केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद

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देहरादून, गौरव जोशी।
भैया दूज के अवसर पर गुरुवार को केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार से प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले मध्य रात्रि 2 बजे से 4 बजे तक आम भक्तों को दर्शन कराए गए। सुबह 4 से 6 बजे तक भगवान शिव की समाधि पूजा संपन्न की गई। ब्रह्ममुहूर्त में केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी बागेश लिंग एवं आचार्यों द्वारा यज्ञ, हवन एवं समाधि पूजन किया गया। भगवान केदारनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को स्थानीय पुष्पों-कुमजा, बुकला, राख, ब्रह्मकमल, सूखे पुष्प-पत्रों से ढककर समाधि रूप दिया गया। जय बाबा केदार के उद्घोष के साथ परम्परानुसार सुबह 6 बजे गर्भ गृह के द्वार बंद किए गए। जबकि ठीक 8:30 बजे मंदिर का मुख्य द्वार बंद किया गया। इसके बाद सेना के बैंडों की मधुर धुनों के बीच बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली बम-बम भोले, जय बाबा केदार के जयघोष के साथ केदारनाथ धाम से पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए रवाना हुई। इस मौके पर मंदिर को फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया। इधर, डोली ने देर सांय अपने पहले पड़ाव रामपुर में विश्राम किया। डोली 24 अक्तूबर को गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर और 25 अक्तूबर को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां आगामी छह माह तक भगवान की शीतकालीन पूजा-अर्चना की जाएगी। दूसरी ओर, यमुनोत्री धाम के कपाट गुरुवार को भैयादूज के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुभ लग्नानुसार दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए हैं। कपाट बंद होने के बाद शनिदेव की अगुवाई में मां यमुना की डोली यमुनोत्री धाम से अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली के लिए निकली और खरसाली पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। अब शीलकाल में छह माह तक मां यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास खरसाली में होंगे। परंपरा अनुसार भैया दूज के पावन पर्व पर खरसाली से शनिदेव की डोली सुबह यमुनोत्री धाम पहुंची। जिसके बाद यमुनोत्री धाम में तीर्थ पुरोहितों द्वारा विधिवत पूजा अर्चना कर कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की और शुभ लग्नानुसार विशाखा नक्षत्र आयुष्मान योग धनु लग्न अमृत बेला पर समय 12:30 बजे यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीलकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की डोली जयकारों के साथ खरसाली के लिए निकली। खरसाली में ग्रामीणों एवं बाहर से आये श्रद्धालुओं ने मां यमुना का भव्य स्वागत किया। मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि शीतकाल में आज से छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मां यमुना के विधिवत दर्शन व पूजा अर्चना शीतकालीन प्रवास खरसाली में स्थित यमुना मंदिर में कर सकेंगे। छह माह बाद अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर ग्रीष्मकाल के लिए यमुनोत्री धाम के कपाट पुन: श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

 

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