देहरादून, गौरव जोशी।
गुजरात में बने सिरप का सैंपल फेल होने पर उत्तराखंड ने खांसी के एक और सिरप को प्रतिबंधित कर दिया है।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सरकार ने बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप पर शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीमें प्रदेशभर में औचक निरीक्षण कर रही हैं। देहरादून क्षेत्र में औषधि विभाग ने कई मेडिकल स्टोरों और शिशु रोग अस्पतालों का निरीक्षण किया। यहां से कई कंपनियों के कफ सीरप जब्त किए गए। इसी कड़ी में गुजरात में बने ब्रोहैग़जिन, टर्ब्यूटालिन और ग्वाफिनसिन सॉल्ट से तैयार कफ सिरप पर उत्तराखंड में रोक लगाई गई है। इन सभी सिरप को लेकर दूसरे राज्यों से शिकायत आई है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सचिव स्वास्थ्य डा. आर राजेश कुमार ने ऐसी दवाइयों को उत्तराखंड में प्रतिबंधित करने के आदेश दिए। इन आदेशों पर डिप्टी ड्रग कंट्रोलर हेमंत सिंह नेगी ने सभी सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर के लिए आदेश जारी किए। निर्देश दिए गए कि तत्काल कार्रवाई की जाए। जहां भी ये दवाएं बिकती पाई जाएं, उनकी बिक्री रुकवाई जाए। सभी को साफ कर दिया जाए कि ये सभी दवाएं उत्तराखंड में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई हैं। ग्राउंड पर जाकर कार्रवाई अमल में लाई जाए। प्रतिदिन की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मुख्यालय में भी दर्ज कराया जाए। ड्रग कंट्रोलर ताजवर जग्गी ने बताया कि तत्काल प्रभाव से आदेशों का पालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कहीं भी आदेशों का उल्लंघन होता पाया गया तो सख्ती से कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। गौरतलब है कि कुल छह नमूने फॉर्म-17 में लेकर राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को भेजे गए हैं। अपर आयुक्त एफडीए व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्टोर पर प्रतिबंधित, असुरक्षित या बिना अनुमति वाली औषधियां न बेची जाएं। विभाग ने सभी विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य, औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम 1940 के तहत कड़ी कार्रवाई होगी।
