लखनऊ, राजेंद्र तिवारी।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज की ओर से आयोजित कराई गई असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा-2025 को राज्य सरकार ने निरस्त कर दिया है। परीक्षा निरस्त करने का यह फैसला एसटीएफ द्वारा जांच में उजागर हुई धांधली का खुलासा करने के बाद किया गया है। इस परीक्षा के जरिये 910 पदों पर असिस्टेंट प्रोफसर की भर्ती की जानी थी। इसके लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 16 व 17 अप्रैल 2025 को परीक्षा आयोजित की थी। प्रदेश सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप नकल माफियाओं के विरुद्ध अभिसूचना संकलन करते हुए एसटीएफ को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा आयोजित कारई गई विज्ञापन संख्या-51 के तहत सहायक आचार्य पद के लिए आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली एवं अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त हुईं थीं। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए गए थे। एसटीएफ ने प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए 20 अप्रैल को एसटीएफ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों महबूब अली, बैजनाथ पाल एवं विनय पाल को परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस संबंध में एसटीएफ द्वारा थाना विभूतिखंड लखनऊ में धारा-112, 308(5), 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023, के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया था। जांच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पाण्डेय से त्यागपत्र लिया गया था चूंकि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। प्रो. कीर्ति पाण्डेय अपनी नियुक्ति का एक वर्ष भी पूरा नहीं कर सकी थीं। पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया था कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे, जिन्हें उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डाटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है। गिरफ्तार अभियुक्तों तथा उनसे संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम एवं मोबाइल नंबर प्रकाश में आए। इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा मांगा गया। प्राप्त डाटा के मिलान में यह तथ्य सामने आया कि उक्त परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। इन तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उक्त परीक्षा को निरस्त किए जाने के आदेश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि इस परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।
