इंसानों की क्षमता को कमजोर बना रही तकनीक

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नई दिल्ली, देव कुमार। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल दफ्तरों में आम होता जा रहा है। विशेष रूप से जेन जेड के काम को यह तकनीक तेज, सटीक और सुविधाजनक बना रही है, वहीं एक नए सर्वे में इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, जेन जेड कर्मचारियों का एक बड़ा समूह ऐसा भी है जो मानते हैं कि अगर एआई का उपयोग कंपनी में बंद करा दिया जाए, तो वे अपना काम नहीं कर पाएंगे और नौकरी छोड़नी पड़ेगी। इनके मन में इस बात का भी डर है कि एआई उनकी जगह ले सकता है। इसका कारण यह है कि एआई अब कई ऐसे कार्य कर रहा है जो पहले इंसान किया करते थे। दूसरे शब्दों में तकनीक की निर्भरता इतनी गहरी हो चुकी है कि लोगों की अपनी क्षमता कमजोर होती जा रही है।
रिज्यूमे जीनियस ने फुल टाइम काम करने वाले जेन जेड कर्मचारियों पर एक सर्वे किया। इसके तहत यह देखा गया कि ये अपने काम में किस तरह एआई का इस्तेमाल कर रहे थे और इसका नतीजा कैसा है। इसमें मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आई। एक ओर जहां लोगों ने एआई के इस्तेमाल से उत्पादकता को बेहतर बताया वहीं एक बड़ा समूह ऐसा भी मिला जिसके मन में नई तकनीक के आने से नौकरी जाने का भय दिखा। एआई के लगातार बदलते अपडेट और हर वक्त जुड़ा रहने के दबाव से 39% युवा तनाव महसूस कर रहे हैं। 23% जेन जेड युवाओं का कहना है कि एआई उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है। सर्वे के अनुसार, कर्मचारियों का एक समूह (31%) ऐसा भी है जिसने एआई के इस्तेमाल में कंपनी की नीतियों तक का उल्लंघन किया, जैसे आंतरिक डाटा को साझा करना। बताया जा रहा है कि 71% जेन जेड पुरुष एआई की मदद से अपना काम पूरा कर रहे वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 48% है। वहीं 69% पुरुष एआई से फीडबैक लेते हैं या काम की जांच करवाते हैं, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 48% है। एआई अब केवल एक टूल नहीं, बल्कि लोगों ने इसे अपना डिफॉल्ट सलाहकार बना लिया है। करियर विशेषज्ञ इवा चान का कहना है कि जेन जेड अब एआई की मदद अपने किसी फैसले के लिए भी ले रही है।

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