खोखले होते जा रहे स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर

अंतरराष्ट्रीय

रोन ग्लेशियर। स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध ग्लेशियरों में अब अजीबोगरीब बदलाव दिख रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से यहां विशालकाय बर्फीले ढांचे अब स्विस चीज जैसे छिद्रों से भरे नजर आ रहे हैं। इनमें अनगिनत गड्ढे और सुरंगनुमा संरचनाएं बन रही हैं।
ग्लेशियर मॉनिटरिंग समूह ग्लैमॉस के प्रमुख और ज्यूरिख के ईटीएचजेड संस्थान के व्याख्याता मैथियास हुस ने हाल ही में ग्लेशियर की स्थिति का जायजा दिया। उन्होंने बताया कि अब बर्फ केवल पिघल नहीं रही, भीतर से खोखली हो रही है। उन्होंने बताया, ‘पहले यह बर्फ गतिशील होती थी, ऊंचाई पर बर्फ गिरती और नीचे पिघलती रहती, जिससे संतुलन बना रहता था। लेकिन अब ऊंचाई पर भी पिघलन हो रही है और नए बर्फ बनना बंद हो रहे हैं।’विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्विस चीज की भांति प्रतीत हो रहा है। रोन ग्लेशियर से लेकर पूरी आल्प्स श्रृंखला तक, बर्फ की सतह में जगह-जगह छेद दिखने लगे हैं। वैज्ञानिकों ने हालात पर चिंता जताते हुए कहा,’ग्लेशियर अब गतिशील नहीं रहे।’ रॉन ग्लेशियर, स्विट्जरलैंड और फ्रांस होते हुए भूमध्य सागर तक बहने वाली रोन नदी को जीवन देता है।’ हुस के अनुसार, इन गड्ढों का निर्माण बर्फ के भीतर जल प्रवाह या हवा के बहाव से होता है। पहले ये छेद बर्फ के बीच में बनते हैं, फिर बड़े होते हैं । ये पहले सामान्य नहीं थे, लेकिन अब हम इन्हें अक्सर देख रहे हैं। ये ग्लेशियर के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं।’ पिछले महीने ब्लाटन गांव में एक बड़े मडस्लाइड ने दुनिया का ध्यान इस संकट की ओर खींचा था। बिर्च ग्लेशियर के नीचे दबा पत्थर का एक विशाल हिस्सा ढह गया, जिससे पूरा गांव कीचड़ में दब गया । हालांकि समय पर खाली करवा लिए जाने से जनहानि नहीं हुई। हाइड्रो पावर पर निर्भर स्विट्जरलैंड के लिए यह और भी चिंताजनक है। ग्लेशियरों के पिघलने से बिजली उत्पादन बाधित हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, एशिया में 2024 में 24 में से 23 ग्लेशियरों में द्रव्यमान की हानि हुई। यूरोप में भी मई महीना अब तक का दूसरा सबसे गर्म रहा। वैश्विक तौर पर, 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की सीमा पहले ही पास हो चुकी है।

Leave a Reply