नई दिल्ली, नीलू सिंह। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किया। वहीं यूपी समेत कई राज्यों में भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी से इस्तीफा दिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में मंगलवार को यूजीसी के नए नियमों के विरोध में छात्रों का आक्रोश देखने को मिला। गेट संख्या-4 के बाहर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और हाथों में नियम वापस लेने की मांग वाले पोस्टर लेकर नारेबाजी की। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ छात्र गेट के भीतर प्रवेश करने का प्रयास करने लगे। सुरक्षा कर्मियों के रोकने पर छात्र उग्र हो गए और गेट को जोर-जोर से हिलाने लगे। डीयू के एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि छात्रों को शांत रहने की अपील की गई, लेकिन वे लगातार अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यूजीसी द्वारा जनवरी 2026 में जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन से जुड़े नियम, 2026’ को लेकर देशभर में असंतोष है। उनका आरोप है कि नियमों के नाम पर भेदभाव की परिभाषा बहुत व्यापक कर दी गई है, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। डीयू के स्नातक छात्र आदित्य शर्मा ने कहा कि भेदभाव खत्म होना जरूरी है, लेकिन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। अन्य छात्रों ने भी नियमों को असंतुलित बताते हुए कहा कि समानता के नाम पर नई संरचनाएं बनाना समाधान नहीं है। छात्रों का दावा है कि इससे शिकायतों की संख्या बढ़ेगी और अकादमिक माहौल प्रभावित होगा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे पहले भी यूजीसी मुख्यालय के बाहर विरोध दर्ज करा चुके हैं।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल में अधिसूचित एक नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार को सहमति जताई। याचिका में दलील दी गई है कि नियम में जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करने वाले वकील की दलीलों पर गौर किया। वकील ने कहा कि सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है। मेरा मुकदमा ‘राहुल दीवान एवं अन्य बनाम भारत सरकार’ है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर कर दी जाएं। हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे। भेदभाव की शिकायतों की जांच और समता को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समता समिति गठित करने को अनिवार्य करने वाले नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।
