नई दिल्ली, नीलू सिंह। असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से असम समेत देशभर में उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हादसे में इनकी सांसें थम गईं। यह जानकारी सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल के आयोजकों ने दी। गर्ग को 2006 में फिल्म ‘गैंगस्टर’ के गीत ‘या अली’ से मिली पहचान मिली थी। इसके लिए उन्हें 2006 में ग्लोबल इंडियन फिल्म अवॉर्ड दिया गया था।
प्रसिद्ध असमिया गायक जुबीन गर्ग का सिंगापुर में शुक्रवार को स्कूबा डाइविंग के दौरान निधन हो गया। वे 52 साल के थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी हैं। जुबीन गर्ग तीन दिवसीय नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में परफॉर्म करने सिंगापुर गए थे। शुक्रवार को उनका शो होना था, लेकिन अब इस हादसे के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री और उनके फैंस में मातम पसर गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुबीन गर्ग के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा, जुबीन गर्ग का अचानक यूं चले जाना स्तब्ध कर देने वाला है। संगीत के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके गाए गीत हर वर्ग में लोकप्रिय रहे हैं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति। गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर कहा कि, जुबीन गर्ग ने अपने स्वर्णिम स्वर से दशकों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनका जाना संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्होंने सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले से संपर्क किया है ताकि जुबीन गर्ग के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द असम लाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए लगातार समन्वय कर रही है। मेघालय में 1972 में जन्मे जुबीन एक असमिया गायक थे, जिनका असली नाम जुबीन बोरठाकुर था। उन्होंने 90 के दशक में अपने अंतिम नाम की जगह अपना गोत्र गर्ग रखकर अपना नाम अपनाया। उन्होंने ‘दिल तू ही बता’ (क्रिश 3), ‘जाने क्या चाहे मन’ (प्यार के साइड इफेक्ट्स) जैसे बॉलीवुड गानों में भी अपनी आवाज दी थी। हिंदी के अलावा उन्होंने असमिया, बांग्ला, नेपाली और कई अन्य भाषाओं में भी गाने गाए और एक बड़ी और वफादार फैन फॉलोइंग बनाई। उन्होंने 1992 में अपना पहला असमिया एलबम ‘अनामिका’ रिलीज़ किया था, जो आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। इसके बाद उन्होंने ‘माया’, ‘अशा’, ‘सपुनर सुर’, ‘जुनाकी मन’ जैसे कई एलबम निकाले। बॉलीवुड में भी उन्होंने कई फिल्मों के लिए गाने गाए, जिनमें ‘दिल से’, ‘फिजा’, ‘कांटे’, ‘डोली सजाके रखना’ और ‘जिंदगी’ शामिल हैं। गायक के साथ-साथ वह 27 असमिया फिल्मों में अभिनेता और तीन फिल्मों के निर्देशक भी रहे। सामाजिक मुद्दों पर भी वह हमेशा मुखर रहे। उन्होंने सीएए कानून का विरोध किया था और यूएलएफए के हिंदी गानों पर प्रतिबंध लगाने के फरमान को खुलेआम नकारा था। उन्होंने असम में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए ‘कलागुरु आर्टिस्ट फाउंडेशन’ नाम से एक चैरिटी संगठन भी चलाया। जुबीन गर्ग को 2024 में मेघालय के यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि भी मिली थी। वह एक कवि और लेखक भी थे और उनकी तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी थीं। पूर्वोत्तर भारत महोत्सव के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत ने बताया कि जुबीन गर्ग कुछ सदस्यों के साथ नौका यात्रा पर गए थे, इस दौरान हादसा हो गया, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। महंत ने बताया कि जुबीन बुधवार को सिंगापुर पहुंचे थे। एक बैठक के दौरान, हमें जुबीन के मैनेजर का फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनका एक्सिडेंट हो गया है और उन्हें सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया है। महंत ने बताया कि हमें बाद में पता चला कि स्थानीय असमिया समुदाय के कुछ सदस्य उन्हें नौका यात्रा पर ले गए थे, जिसके बारे में हमें पहले से कोई जानकारी नहीं थी। जबकि इससे पहले आयोजकों ने बताया था कि उनकी मौत स्कूबा डाइविंग से हुई थी। उन्होंने कहा है कि हादसे के बाद 19 सितंबर से शुरू होने वाला तीन दिवसीय महोत्सव रद्द कर दिया गया।
