मास्को। ईरान और इजरायल के बीच पिछले सात दिन से संघर्ष जारी है। मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव को लेकर दुनिया के कई देश बयान जारी कर रहे हैं। इस बीच, रूस ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है। गुरुवार को रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा, ईरान के खिलाफ अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप करना खतरनाक कदम होगा। यह कई अप्रत्याशित नकारात्मक परिणामों को साथ लेकर आएगा। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ईरान-इजरायल के संघर्ष से दुनिया में तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने दोनों देश को विवाद बढ़ाने की जगह सीजफायर पर ध्यान देने की जरूरत पर ध्यान देने को कहा। दरअसल, यह अटकलबाजी होने लगी है कि वाशिंगटन अगले हफ्ते तक इजरायल के साथ लड़ाई में शामिल हो सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत में जिनपिंग ने कहा, अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए सशस्त्र बल सही तरीका नहीं है। बल्कि युद्धविराम को बढ़ावा देना सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। इस दौरान दोनों ने फोन पर घंटे भर बात की। उन्होंने अपनी-अपनी एजेंसियों को ईरान के बारे में जानकारी साझा करने के आदेश जारी करने पर सहमति जताई। इससे पहले, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की और कहा कि मॉस्को एक ऐसा समझौता कराने में मदद कर सकता है, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर शांतिपूर्वक आगे बढ़ सकता है और इजरायल की सुरक्षा चिंताएं भी कम हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के पत्रकारों से बात करते हुए पुतिन ने कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है। मेरे विचार से, एक समाधान निकल सकता है। पुतिन ने कहा कि हम किसी पर कुछ भी थोप नहीं रहे हैं। सिर्फ इस बारे में बात कर रहे हैं कि हम इस स्थिति से बाहर निकलने का संभावित रास्ता कैसे ढूंढ सकते हैं। लेकिन, निश्चित रूप से, यह निर्णय इन सभी देशों, मुख्य रूप से ईरान और इजरायल के राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर है। सीरिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक ने गुरुवार को लेबनानी समूह हिजबुल्लाह को उसके मुख्य समर्थक ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर हिजबुल्लाह इस लड़ाई में साथ में आता है तो यह एक बहुत, बहुत बुरा निर्णय होगा। दरअसल, बरक तुर्किये में अमेरिकी राजदूत भी हैं और बेरूत की अपनी पहली यात्रा पर हैं। उन्होंने यहां संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी सहित शीर्ष लेबनानी अधिकारियों से मुलाकात की।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघई ने संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी (आईएईए) प्रमुख राफेल ग्रॉसी की आलोचना की। उन्होंने आईईएई पर इजरायल द्वारा शुरू किए गए अन्यायपूर्ण आक्रामक संघर्ष में भागीदार होने का आरोप लगाया। एक्स पर एक पोस्ट में बाघई ने ग्रॉसी के साक्षात्कार का जवाब दिया, जिसमें कहा था कि परमाणु हथियार विकसित करने के लिए ईरान के व्यवस्थित प्रयास का कोई सबूत नहीं है। इस पर ग्रॉसी ने कहा, यह बहुत देर हो चुकी है। पिछले हफ्ते आईएईए के एक प्रस्ताव में ईरान को परमाणु अप्रसार संधि के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन करने की घोषणा की गई थी, जिसका उपयोग इजरायल के हमलों के बहाने के रूप में किया गया था। इजरायल-ईरान के बीच जारी संघर्ष के बाद तुर्किये ने ईरान के साथ अपनी सीमा की सुरक्षा बढ़ा दी है। तुर्किये के रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि अंकारा ने ईरान से लोगों के आने की अभी तक कोई सूचना नहीं है। इसके अलावा, तुर्किये घरेलू स्तर पर उत्पादित रडार और हथियार प्रणालियों का उपयोग करके एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित भी कर रहा है।
