पटेल पूरे कश्मीर को भारत में मिलाना चाहते थे पर नेहरू ने अनुमति नहीं दी: मोदी

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नई दिल्ली, नीलू सिंह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरदार पटेल अन्य रियासतों की तरह पूरे कश्मीर को भी भारत में मिलाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं होने दिया। गुजरात के एकता नगर में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय समारोहों को संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने यह बता कही।
उन्होंने कहा, सरदार पटेल का मानना ​​था कि इतिहास लिखने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि इतिहास बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। पीएम ने कहा, आजादी के बाद सरदार पटेल ने 550 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कराने का असंभव सा लगने वाला कार्य पूरा किया। उन्होंने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, इससे नया इतिहास रचा गया। मोदी ने कहा, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत का विचार उनके लिए सर्वोपरि था।’ कांग्रेस पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि कश्मीर और देश को इस मुद्दे से निपटने में पार्टी की गलतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कश्मीर का विभाजन हुआ, उसे अलग संविधान और अलग झंडा दिया गया और कांग्रेस की गलती का खामियाजा देश को दशकों तक भुगतना पड़ा।
मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के लिए देश की संप्रभुता सर्वोपरि थी लेकिन उनके निधन के बाद सरकारों ने संप्रभुता के संबंध में गंभीरता नहीं दिखाई। कांग्रेस की कमजोर नीतियों के कारण कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चला गया, जिसने फिर राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दिया। कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के आगे झुकी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 की बेड़ियां तोड़कर जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से मुख्यधारा में शामिल हो गया। आज पाकिस्तान और आतंकवादी भी जानते हैं कि भारत की असली ताकत क्या है। ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने देखा कि अगर कोई भारत पर बुरी नजर डालेगा तो हम उसके घर में घुसकर उसे खत्म कर देंगे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, पार्टी को भारत पर राज करने वाले अंग्रेजों से गुलामी की मानसिकता विरासत में मिली है। अब देश औपनिवेशिक मानसिकता के हर निशान को मिटा रहा है। मोदी ने पूछा, राजनीतिक अस्पृश्यता को देश में एक संस्कृति बना दिया गया था। हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस ने बासाहेब आंबेडकर के साथ उनके जीवनकाल में और उनके निधन के बाद भी क्या किया? उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. लोहिया और जयप्रकाश नारायण के साथ क्या किया? उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी हमले और षड्यंत्र किए गए। इस दौरान मोदी ने कांग्रेस पर धार्मिक आधार पर वंदे मातरम के कुछ हिस्से को हटाने का आरोप लगाया। पिछले 11 वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक यह समस्या देश से जड़ से समाप्त नहीं हो जाती। मोदी ने कहा, 2014 से पहले देश के लगभग 125 जिले माओवाद के आतंक से प्रभावित थे। आज यह 11 जिलों तक सीमित है। उनमें भी केवल तीन जिलों में ही नक्सलवाद कायम है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि घुसपैठिये हमारे संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं और जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ रहे हैं, जिससे देश की एकता खतरे में पड़ रही है। लेकिन पिछली सरकारों ने केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आंखें मूंद ली थीं। प्रधानमंत्री ने कहा, देश ने घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत में रह रहे हर अवैध प्रवासी को बाहर निकाला जाए। कुछ राज्यों में भाषा विवाद के बीच प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर भाषा एक राष्ट्रीय भाषा है और किसी भी भाषा को दूसरों पर थोपने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया। भाषा को भारत की एकता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की सैकड़ों भाषाएं और बोलियां इसकी खुली और रचनात्मक सोच का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय भाषा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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