नई दिल्ली, नीलू सिंह। संसद के शीतकालीन सत्र के आगाज से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक कहा कि ड्रामा करने के लिए जगह बहुत होती है। जिसको करना है, करते रहें। संसद ड्रामा नहीं, डिलीवरी की जगह है। नारे के लिए भी जितने नारे बुलवाने हैं, पूरा देश खाली पड़ा है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जहां पराजित होकर कर आए हैं, वहां बोल चुके हो। जहां अभी पराजय के लिए जाने वाले हो, वहां भी बोल दीजिए। लेकिन यहां तो नारे नहीं, नीति पर बल देना चाहिए और वो आपकी नीयत होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने शीत सत्र के लिए संसद भवन पहुंचने पर मीडिया के माध्यम से संबोधन में कहा कि संसद ड्रामा नहीं, काम करने की जगह है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद को चुनावी हार के बाद हताशा निकालने का मंच बना रहा है। संसद रचनात्मक और परिणामोन्मुखी बहस का मंच होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष चाहे तो वह उसे राजनीति में सकारात्मकता लाने के कुछ सुझाव देने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से विपक्ष जो ‘खेल’ खेल रहा है, वह अब जनता को स्वीकार नहीं है। मोदी ने संसद की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि हमें जिम्मेदारी की भावना से काम करने की जरूरत है। मोदी ने कहा कि कुछ समय से संसद का इस्तेमाल या तो चुनावों के लिए कथित तैयारी या चुनाव में हार के बाद अपनी हताशा निकालने के लिए किया जा रहा है। बिहार चुनावों में विपक्ष की करारी हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी नतीजों से विचलित है और हार को पचा नहीं पा रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हार अवरोध पैदा करने का आधार नहीं बननी चाहिए और जीत भी अहंकार में नहीं बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए चुनावी हार के बाद के अवसाद से बाहर आना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से संसद के उद्देश्य को समझने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के हालिया बयानों से लगता है कि वे चुनावी परिणामों को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। एक-दो दल हैं जो अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे। कल उनके जो बयान सुने, उनसे ऐसा लगता है कि हार ने उन्हें बेहद परेशान किया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि युवा सांसदों की नई पीढ़ी को मौके दिए जाने चाहिए। सदन को उनके अनुभवों से फायदा होना चाहिए और इस सदन के जरिए देश को भी उनके नए नजरिए से फायदा होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को भी राज्यसभा के सभापति के तौर पर पहले सत्र की अध्यक्षता करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
