नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को निलंबित कर दिया। अदालत ने सेंगर को जमानत पर रिहा करने का आदेश भी दिया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना मंगलवार रात को इंडिया गेट के सामने धरने पर बैठ गईं। हालांकि कर्तव्य पथ पुलिस ने योगिता भयाना के साथ बैठीं दो अन्य महिलाओं को जबरन धरना स्थल से उठा दिया। इसके बाद उन्हें थाने ले जाने के बाद छोड़ दिया गया।
मंगलवार को न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के तीन जमानती देने की शर्त पर राहत दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेंगर पीड़िता के घर से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे और न ही उसे या उसकी मां को किसी भी प्रकार से धमकाएंगे। अदालत ने कहा कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः रद्द कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने मामले में दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील लंबित रहने तक सेंगर की सजा पर रोक लगाई है। सेंगर ने दिसंबर 2019 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट पूर्व विधायक को नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में धरना देने इंडिया गेट पहुंची योगिता भयाना ने अपने एक्स हैंडल से इसकी सूचना दी थी। उनके साथ उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता और परिजन थी। योगिता के अलावा दोनों महिलाओं ने अपने चेहरे ढक रखे थे। इनके गले में तख्ती लटकी थी जिसपर फैसले के विरोध की जानकारी दी गई थी। इधर सूचना मिलते ही नई दिल्ली जिला पुलिस ने इलाके को घेर लिया। मौके पर कर्तव्य पथ थाने के एसएचओ ने धरना दे रहीं तीनों महिलाओं को समझाने की कोशिश की। जब वे नहीं मानीं तो महिला पुलिसकर्मियों की मदद से तीनों को जबरन मौके से उठा लिया गया। पुलिस ने इंडिया गेट के चारों तरफ सुरक्षा कड़ी कर दी है। इसके अलावा तीनों महिलाओं को घरों को पहुंचा दिया गया है। गौरतलब है कि यह मामला 2017 का है। एक नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म का आरोप सेंगर पर लगा था। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक अगस्त, 2019 को यह मामला और इससे जुड़े अन्य मामलों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था, ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके। इसके अलावा, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में भी सेंगर की अपील लंबित है। मामले में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दस साल की सजा सुनाई थी। उसमें भी सेंगर ने यह कहते हुए सजा निलंबन की मांग की है कि वह पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है।
