कैलास मानसरोवर यात्रा : हेलीकॉप्टर उड़ा नहीं और सड़क भी बंद कैसे निकलें वीआईपी

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हल्द्वानी, गौरव जोशी। कैलास मानसरोवर यात्रा बीच में छोड़कर लौट रहीं पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी लगातार दूसरे दिन भी उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में फंसी रहीं। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, वहीं सड़क मार्ग भी भूस्खलन के चलते बाधित हो गया। एंबुलेंस से धारचूला लाए जाने की कोशिश के दौरान वे रास्ते में ही लमारी के पास फंस गईं। उन्हें फिलहाल एसएसबी के गेस्ट हाउस में ठहराया गया है और सड़क खुलने का इंतजार किया जा रहा है।
शनिवार को मानसरोवर यात्रा के दौरान चीन के तिब्बती क्षेत्र दार्चिन में घोड़े से गिरने के कारण मीनाक्षी लेखी को कमर में चोट लगी। इसके बाद उन्होंने यात्रा बीच में छोड़कर भारत लौटने का निर्णय लिया। चीन प्रशासन की मदद से उन्हें लिपुलेख तक पहुंचाया गया, जहां आईटीबीपी ने उन्हें रेस्क्यू कर रविवार दोपहर करीब एक बजे तक गुंजी पहुंचाया। वहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए देहरादून या दिल्ली एयरलिफ्ट किया जाना था, लेकिन खराब मौसम ने इसमें अड़ंगा डाल दिया।
सोमवार को भी गुंजी में मौसम नहीं सुधर पाया, जिस कारण धारचूला से गुंजी के लिए हेलीकॉप्टर रवाना नहीं हो सका। इसके बाद उन्हें सड़क मार्ग से धारचूला लाने की योजना बनी। आईटीबीपी की एंबुलेंस से गुंजी से रवाना किया गया, लेकिन लगभग 40 किमी की दूरी तय करने के बाद लमारी के पास सड़क भूस्खलन के कारण बंद मिली। भारी बोल्डरों और मलबे के कारण मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। स्थिति को देखते हुए मीनाक्षी लेखी को एसएसबी के लमारी स्थित गेस्ट हाउस में ठहराया गया। देर शाम तक बीआरओ की टीम मार्ग खोलने के प्रयास में जुटी रही, लेकिन बड़े बोल्डरों के कारण कार्य में लगातार बाधा आ रही थी। देर रात तक सड़क खुलने की संभावना जताई गई। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के सीमांत इलाकों की दुश्वारियों को अब वीआईपी भी नजदीक से महसूस कर रहे हैं। वर्षों से जिन कठिन हालात में स्थानीय लोग जीवन बिता रहे हैं, अब वही हालात राज्य में आने वाले विशिष्ट अतिथियों के अनुभवों में भी झलकने लगे हैं। बीते वर्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग के बाद बिना बिजली वाले गांव में रात गुजारनी पड़ी थी। अब पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी को खराब मौसम और बंद सड़क के कारण लंबे समय तक फंसे रहना पड़ा है। 16 अक्तूबर 2024 को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ जिले में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत मिलम क्षेत्र के मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने निकले थे। खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग रालम गांव में करानी पड़ी। यह गांव चीन सीमा के समीप स्थित है और यहां न बिजली है, न सड़क, न ही संचार की सुविधा। चुनाव आयुक्त को रालम गांव के एक घर में रात बितानी पड़ी। पर्यटकों के एक दल ने उन्हें खाने में मदद की, जबकि पातों गांव के कुछ ग्रामीणों ने चाय उपलब्ध कराई। लगभग 18 घंटे बाद अगली सुबह उन्हें मुनस्यारी के लिए हेली रेस्क्यू किया गया। अब यही स्थिति पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी को झेलनी पड़ी है। कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान धारचूला लौटते वक्त खराब मौसम के कारण उनका हेली रेस्क्यू दो दिन से रुका है। करीब 30 घंटे से वे उच्च हिमालयी क्षेत्र में फंसी हुई हैं। सड़क मार्ग से लाने के प्रयास भी अब तक सफल नहीं हो पाए हैं। सीमांत क्षेत्र के ग्रामीण मानसून काल में अक्सर ऐसी ही परिस्थितियों से दो-चार होते हैं, मगर यह पीड़ा अब उन तक भी पहुंचने लगी है, जो आमतौर पर सुविधाओं से घिरे रहते हैं।

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