नई दिल्ली, नीलू सिंह । भारत- अमेरिका ने टैरिफ मुद्दे पर तल्खी के बीच शुक्रवार को रक्षा क्षेत्र से जुड़े 10 साल के एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह समझौता कुआलालंपुर में हुई बैठक के दौरान राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष पीटर हेगसेथ के बीच संपन्न हुआ।
भारत- अमेरिका में पहले से जारी रक्षा समझौता हाल ही में खत्म हुआ है। नए समझौते के तहत इसे अगले दस साल के लिए बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी की रूपरेखा नामक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 2025-35 के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है। सूत्रों के अनुसार, इनमें सहयोग के उन क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, जहां अगले दस वर्षों के दौरान दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे। हालांकि, फ्रेमवर्क समझौते पर कोई विशिष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है लेकिन प्रारंभिक जानकारी से पता चला है कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र से जुड़े अहम क्षेत्रों में भागीदारी को मजबूत करेंगे। इसमें हथियार निर्माण से लेकर शोध और सैन्य अभ्यास तक शामिल है। मालूम हो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए कुआलालंपुर गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता भारत और अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि दक्षिण एशियाई देशों में भारत अमेरिका के लिए अहम है। ये समझौता वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारत-चीन में तनातनी और दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के बढ़ते दावे का सटीक जवाब है। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हुआ समझौता रणनीतिक रूप से अहम है और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी साल फरवरी में अमेरिका दौरे पर थे। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से ‘मिशन 500’ का ऐलान किया था। इसके जरिए वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर करना है। रक्षा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि रक्षा समझौता दोनों देशों के बीच अगले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को 10 से 15 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि भारत- अमेरिका के रिश्तों में कुछ समय से तल्खी है लेकिन रक्षा समझौता इस बात का संकेत है कि इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। इस समझौते के माध्यम से दोनों देश दुर्लभ हथियारों के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत बनाएंगे। टैरिफ समेत अन्य मसलों को लेकर दोनों देशों के बीच हाल में जो कुछ हुआ उम्मीद है कि सब बेहतर होगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री ने 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के अवसर पर अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ से मुलाकात की। बैठक रचनात्मक रही और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों मंत्रियों में आमने-सामने की बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में निरंतर प्रगति की सराहना की और सभी क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा मंत्री ने मौजूदा रक्षा मुद्दों और चुनौतियों की समीक्षा की और रक्षा उद्योग एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर विचार-विमर्श किया। बता दें, भारत और अमेरिका सैन्य अभ्यासों और गतिविधियों, सूचना साझाकरण, समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग, रक्षा उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग और रक्षा समन्वय तंत्रों के माध्यम से रक्षा संबंधों का विस्तार और गहनता जारी रख रहे हैं।
