नई दिल्ली, नीलू सिंह। भारत और रूस शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 15 समझौतों और एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें दो अहम समझौते श्रमिकों की आवाजाही को लेकर हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार रात को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा आयोजित भोज में शामिल हुए। भोज में कई हस्तियां भी शामिल हुईं। इसके बाद करीब दस बजे पुतिन अपने विमान से वापस रूस लौट गए।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि इससे भारतीय पेशेवरों के लिए रूस में रोजगार के मौके बढ़ेंगे तथा अवैध रूप से रोजगार हासिल करने पर रोक लगेगी। श्रमिकों की आवाजाही से संबंधित एक समझौता कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के लिए रूस जाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए है। जबकि दूसरा अवैध प्रवेश को हतोत्साहित करने के लिए है। विदेश मंत्रालय के अनुसार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र में शोध एवं विशेषज्ञों का आदान प्रदान, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का रूसी एजेंसी के साथ उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर समझौता। दोनों अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगे, पोलर वाटर में शिपिंग के प्रशिक्षण के लिए दोनों देशों के बीच समझौता, दोनों देशों के बीच समुद्र में मिनरल की खोज के लिए समझौता, यूरिया उत्पाद को लेकर राष्ट्रीय केमिकल और रूसी एजेंसी के बीच समझौता, भारत में संयुक्त उपक्रम में यूरिया उत्पादन होगा, सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए दोनों देशों की कस्टम एजेंसियों के बीच समझौता, एक-दूसरे देशों में पत्र भेजने के लिए दोनों देशों की डाक एजेंसियों के बीच करार, डिफेंस इंस्टीट्यूट आफ एडवांस टेक्नोलॉजी पुणे तथा रूस के रक्षा संस्थान के साथ शोध समझौता, मुंबई विवि और लोमोनोसोव विवि के बीच अकादमिक समझौता, पांच समझौते प्रसार भारती और रूस के मीडिया संस्थानों के बीच हुए हैं जिनका उद्देश्य कंटेंट शेयरिंग है। इनमें गाजप्रोन मीडिया होल्डिंग, नेशनल मीडिया ग्रुप, बिग एशिया मीडिया, टीवी नोवोस्ती तथा टीवी ब्रिक्स ज्वाइंट कंपनी है के लिए समझौता हुआ।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निवेश से जुड़ी योजनाओं में तेजी लाएं। इसी से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। दोनों देशों ने बयान जारी कर कहा कि टैरिफ और गैर टैरिफ समस्याओं का आपस में मिलकर समाधान किया जाए। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों देश राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं। इस फैसले से दोनों देशों की आर्थिक ताकत बढ़ेगी। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ रूसी सेना में काम कर रहे भारतीयों की वापसी का मुद्दा उठाया है। विदेशी सचिव विक्रम मिसरी ने ये जानकारी देते हुए बताया कि भारत रूस की सेना में काम कर रहे लोगों को छोड़ने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। आगे से सेना में भारतीयों की भर्ती पर रोक लगाने की भी अपील की गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 127 भारतीयों को रूसी सेना में शामिल किया गया था। इसमें से 98 को वापस लाया गया है जबकि 12 लोग लापता हैं। विदेश सचिव ने लोगों को चेताया कि वे रूसी सेना में शामिल होने के लिए ऑफर स्वीकार न करें। जो लोग वहां फंसे हैं उन्हें सुरक्षित निकालने की कवायद जारी है।
