लखनऊ, राजेंद्र तिवारी। यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तारीख बढ़ा दी गई है। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे व आपत्तियां 6 मार्च तक दी जा सकेंगी। नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सुनवाई अब 27 मार्च तक होगी। अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को जारी की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने लोकभवन में शुक्रवार को बताया कि मतदाता बनने के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। यूपी में अभी विधानसभा चुनाव में समय है, ऐसे में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। ऐसे में दावे-आपत्तियां करने व नोटिस पर सुनवाई के लिए लोगों को और समय देने का फैसला किया गया है। चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजा गया था और उसने इस पर मुहर लगा दी है। अभी तक 6 फरवरी दावे व आपत्तियां और 27 फरवरी तक नोटिस पर सुनवाई होनी थी। 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची जारी होनी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने तारीख आगे बढ़ा दी है। बुजुर्ग मतदाताओं सहित सभी वोटरों को यह भी सहूलियत दे दी गई है कि वह नोटिस पर अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को दस्तावेज देकर सुनवाई को भेज सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में शामिल 1.04 करोड़ लोग जिनका मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुआ है और 2.22 करोड़ तार्किक विसंगितयों वाले मतदाताओं को नोटिस जारी की जा रही है। कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं में अब तक 2.37 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी हो चुकी है। 86.27 लाख मतदाताओं के घर नोटिस पहुंच चुकी है। इसमें से 30.30 लाख मतदाताओं की सुनवाई भी हो चुकी है। यह कुल मतदाताओं का 9.2 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि 27 अक्तूबर 2025 से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई और 4 नवंबर से गणना चरण शुरू हुआ था। 6 जनवरी 2026 को 12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई और तब तक 16.18 लाख लोगों ने मतदाता बनने को फॉर्म-6 भरे। ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद पिछले एक महीने में 37.80 लाख लोगों ने आवेदन किए। मतदाता बनने को सबसे अधिक एक दिन में 3.51 लाख फॉर्म-6 बीती 5 फरवरी को भरे गए। 1073 प्रवासी भारतियों ने वोटर बनने को फॉर्म भरे। यूपी में कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी की जा रही है, इसमें 2.22 करोड़ तार्किक विसंगति वाले मतदाता हैं। बीएलओ इनके घर पर जाकर नोटिस देंगे और उनसे विसंगति से संबंधित कागज लेकर मौके पर ही ऐप से सत्यापन कर मामला निस्तारित करेंगे। ये नाम में गड़बड़ी, पिता के नाम में अंतर, बेटा-बेटी व माता-पिता की आयु में 15 साल से कम अंतर व बाबा-दादी से पौत्र-पौत्री की आयु में 50 साल से कम अंतर वाले मतदाता हैं। इनके नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से पहले से है। सीईओ ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गुपचुप ढंग से नहीं कट सकता। मतदाता सूची में किसी के नाम पर आपत्ति केवल उसी विधानसभा का वोटर कर सकता है। उसे फॉर्म-7 में नाम, वोटर आईडी कार्ड नंबर और कारण सहित अपना हस्ताक्षर करने होंगे। एक साथ ज्यादा फॉर्म जमा करने की व्यवस्था नहीं है। राजनीतिक दलों के 5.79 लाख बीएलए प्रतिदिन 10-10 फॉर्म भर सकते हैं। 6 जनवरी से पहले 49399 लोगों ने और उसके बाद पिछले एक महीने में 82684 लोगों ने फॉर्म-7 भरे हैं। राजनीतिक दलों की ओर से सिर्फ 1567 फॉर्म-7 जमा कराए गए हैं। गलत ढंग से कटवाने के प्रयास में मतदाता एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। वाराणसी में मंत्री रवींद्र जायसवाल के बड़ी संख्या में एक ही मतदाता के दो-तीन बार नाम होने की शिकायत की जांच होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी बीएलओ के साथ अभद्रता होने पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश डीएम को दिए गए हैं। इटावा में एक बीएलओ के साथ अभद्रता का मामला सामने आया था। वहां बीएलओ से अभद्रता करने वाले राजनीतिक दल के व्यक्ति ने आपसी सुलह-समझौता कर लिया, जिससे मामला शांत हो गया। बाकी कोई शिकायत नहीं मिली है। नोटिस पर सुनवाई के लिए सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) की संख्या और बढ़ाई जाएगी। पहले चरण में 2042 एईआरओ बनाए गए। दूसरे चरण में 6948 बने। अभी कुल 8990 एईआरओ हैं। नोटिस पर सुनवाई के लिए जरूरत के अनुसार और एईआरओ बढ़ाए जाएंगे।
