पटना, राजेंद्र तिवारी। वर्ष 2000 में झारखंड बंटवारे के बाद बिहार ने विधानसभा चुनाव में पहली बार 60 फीसदी से अधिक मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया है। यह करीब 65 फीसदी पहुंच गया। मतदान का यह आंकड़ा वर्ष 2020 में हुए पिछले चुनाव से करीब 8 फीसदी अधिक है।
बिहार के मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव के पहले चरण के चुनाव में गुरुवार को इतिहास रच दिया। राज्य में मतदान प्रतिशत के अबतक के सारे रिकार्ड टूट गए। 18 जिलों में 121 विधानसभा क्षेत्रों में 64.64 फीसदी मतदान हुआ। यह पिछले विधानसभा चुनाव 2020 से करीब साढ़े सात फीसदी अधिक है। सबसे ज्यादा बेगूसराय में 68.20 फीसदी और शेखपुरा में सबसे कम 52.36 फीसदी मतदान हुए। बिहार में 1951 से लेकर अबतक हुए (सभी लोकसभा एवं विधानसभा) चुनावों में इसके पहले कभी मतदान का प्रतिशत 64.64 फीसदी नहीं रहा है। 1951 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 40.35 फीसदी तो उस वर्ष विधानसभा चुनाव में 42.6 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं, 1998 के लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 64.6 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि, 2000 के विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक 62.57 प्रतिशत मतदान हुआ था।
वहीं राज्य बंटवारे के बाद 25 वर्षों में पांच विधानसभा चुनाव हुए, मगर कभी भी मतदान का आंकड़ा 57 फीसदी से अधिक नहीं गया। बिहार विधानसभा चुनाव में अब तक सबसे अधिक मतदान 56.93 फीसदी 2020 में हुआ था। वहीं सबसे कम 45.85 फीसदी मतदान अक्तूबर 2005 में हुआ। इससे पहले बिहार में 60 फीसदी से अधिक (62.57 फीसदी) वोटिंग 2000 में हुई थी, जब बिहार का बंटवारा नहीं हुआ था। उसके बाद 2005 में बिहार विधानसभा के दो चुनाव (फरवरी और अक्तूबर में) हुए, जिसमें 50 फीसदी से भी कम वोट पड़े। इन चुनावों में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का मतदान प्रतिशत अधिक था। लेकिन, 2010 के चुनाव में पहली बार महिलाओं के मतदान का आंकड़ा पुरुषों के मुकाबले बढ़ गया। इससे मतदान प्रतिशत में भी खासी बढ़ोतरी हुई। इस साल पुरुषों के मुकाबले तीन फीसदी अधिक महिलाओं ने मतदान किया, जबकि कुल मतदान लगभग 53 फीसदी हुआ। इसके बाद हुए दो विधानसभा चुनावों में भी महिलाओं के मतदान का आंकड़ा पुरुषों से अधिक रहा। 2015 में 53.32 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 60.48 फीसदी, जबकि 2020 में 54.49 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 59.69 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया। महिलाओं का मतदान बढ़ने से कुल मतदान प्रतिशत 52 से 57 फीसदी तक पहुंचा। बिहार में पिछली बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2003 में हुआ था। एसआईआर के बाद हुए 2005 के दो विधानसभा चुनाव (फरवरी और अक्तूबर) में 50 फीसदी से कम वोटिंग हुई। 2020 में हुए पिछले चुनाव में भी करीब 57 फीसदी ही वोट पड़े थे। इसे बढ़ाने को लेकर एसआईआर प्रक्रिया के साथ-साथ मतदाता जागरूकता के भी कार्यक्रम चलते रहे। शिक्षण संस्थानों में संवाद, परिर्चाएं हुईं। मिशन 60 के तहत कम वोटिंग वाले मतदान केन्द्रों को चिन्हित करते हुए वहां वोट प्रतिशत बढ़ाने को लेकर कई उपाय किये गये।
