देहरादून, गौरव जोशी। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी को केवल नियमित वेतन, लेखा बिल पारित करने को आहरण वितरण का अब अधिकार रहेगा। विश्वविद्यालय के अधीन समस्त विकास और अन्य गैर-नियमित व्यय के आधिकार जिलाधिकारी देहरादून में ही निहित रहेंगे। विश्वविद्यालय के अन्तर्गत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के छात्र वेतन एवं छात्रवृत्ति के भुगतान को उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय अधिनियम में निहित प्राविधानानुरूप वित्त अधिकारी द्वारा ही बिलों का भुगतान किया जाएगा।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हो रही वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत, भ्रष्टाचार, शासकीय सम्पत्ति धन के दुरूपयोग की शिकायतों पर शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। सचिव आयुष दीपेंद्र कुमार चौधरी ने आयुर्वेद विवि के वित्तीय अधिकार फ्रीज करते हुए डीएम देहरादून को सभी वित्तीय आहरण वितरण अधिकार सौंप दिए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन पर बिना शासन की अनुमति के सृजित पदों से अधिक तैनाती किए जाने का आरोप है। प्रवेश परीक्षाओं में धांधली किए, अन्य नियम विरूद्ध काम किए जाने की लगातार शिकायतें शासन को मिल रही थी। इन तमाम शिकायतों और लेखा परीक्षा विभाग के विश्वविद्यालय में कराए गए ऑडिट के बाद आई रिपोर्ट पर शासन ने कार्रवाई का फैसला लिया है। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में संचालित अविधिक, असंवैधानिक, अवैध और नियम विरूद्ध कार्यों पर प्रकाश डाला गया है। इन गड़बड़ियों से उत्पन्न संवैधानिक तन्त्र की विफलता और विश्वविद्यालय द्वारा शासकीय आदेशों की लगातार की जा रही अवहेलना को देखते हुए जनहित एवं कार्यहित में वित्तीय अधिकार छीन लिए गए हैं। अग्रिम आदेशों तक विश्वविद्यालय के समस्त वित्तीय एवं आहरण वितरण के अधिकार जिलाधिकारी देहरादून में निहित कर दिए गए हैं। शासन ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय के उपसचिव संजीव कुमार पाण्डेय की पदोन्नति, नियुक्ति पर भी ब्यौरा तलब किया है। अनुसचिव ज्योति सिंह ने प्रभारी कुलसचिव उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी। विवि को भेजे पत्र में कहा कि शासन को प्राप्त संजीव कुमार पांडेय उपकुलसचिव आयुर्वेद विवि की अवैध पदोन्नति, नियुक्ति को लेकर शिकायत मिली है। इस शिकायत पर पूर्व में भी विवि से रिपोर्ट मांगी गई थी, जो आज तक प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट दी जाए।
