अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर स्वास्थ्य सेवाओं में दिखाया आत्मविश्वास
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बाल सशक्तिकरण और नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के तहत वाराणसी के रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री सरकारी अस्पताल में “बालिकाओं के नेतृत्व” गतिविधि का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्लान इंडिया और मोगली ट्रस्ट द्वारा संचालित कॉम्प्रिहेंसिव स्कूल इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता का विकास करना था।

इस विशेष अवसर पर राधा किशोरी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, रामनगर की दो बालिकाओं ने सक्रिय भागीदारी करते हुए नेतृत्व का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गिरीश चंद्र द्विवेदी और इम्युनाइजेशन ऑफिसर श्री श्वेत सिंह की भूमिका निभाई। इस अनुभवात्मक गतिविधि के माध्यम से उन्होंने अस्पताल के प्रशासनिक और चिकित्सकीय कार्यों को नज़दीक से समझा और नेतृत्व का वास्तविक अनुभव प्राप्त किया। बालिकाओं ने टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रक्रिया, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन, और रोग प्रतिरक्षण की महत्ता पर गहन जानकारी हासिल की। उन्होंने यह भी जाना कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की सुनिश्चितता में कुशल नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन की क्या भूमिका होती है। इस पहल से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने समाज में अपनी संभावित भूमिका को और स्पष्ट रूप से महसूस किया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बालिकाओं के उत्साह और जिज्ञासा की सराहना की। डॉ. गिरीश चंद्र द्विवेदी ने उन्हें नेतृत्व के गुणों और स्वास्थ्य क्षेत्र की विविध जिम्मेदारियों से अवगत कराया, जबकि डॉ. श्वेत सिंह ने उन्हें टीकाकरण प्रक्रिया, जागरूकता अभियानों और बाल स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर राधा किशोरी जीजीआईसी की प्राचार्या साधना राय, शिक्षिका अनुराधा पांडे, प्लान इंडिया की प्रोजेक्ट प्रमुख प्रियंका सिन्हा और कम्युनिटी कार्यकर्ता संगीता ओझा भी उपस्थित रहीं। सभी ने बालिकाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहलें न केवल छात्राओं को प्रेरित करती हैं, बल्कि समाज में बालिकाओं की भूमिका को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती हैं। यह आयोजन बालिकाओं के लिए केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक कदम था। इसने यह संदेश दिया कि अवसर मिलने पर बालिकाएँ किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने और नेतृत्व संभालने की पूरी क्षमता रखती हैं। “बालिकाओं के नेतृत्व” कार्यक्रम ने यह साबित किया कि आत्मविश्वास और अवसर के मेल से बेटियाँ न केवल अपने भविष्य का निर्माण कर सकती हैं, बल्कि समाज को भी नई दिशा दे सकती हैं।
