काठमांडू। नेपाल में जारी सियासी संकट शुक्रवार को खत्म हो गया। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ लीं।
नेपाल में चार दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता का शुक्रवार को अंत हो गया। देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 73 वर्षीय कार्की को अंतरिम सरकार की बागडोर सौंपी गई है। गौरतलब है कि नेपाल में युवाओं के विद्रोह के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को काशी से राजनीति की दीक्षा मिली। कार्की बीएचयू की छात्रा रही हैं और 1975 में उन्होंने यहां से राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री ली। विराटनगर से स्नातक की पढ़ाई के बाद कार्की बीएचयू आई थीं। 52 साल पहले कार्की के पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी ने नेपाल में लोकतंत्र बहाली के लिए एक विमान को हाइजैक किया था।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति राम सहाय यादव और मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह रावत भी मौजूद थे। राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि नई अंतरिम सरकार का प्रमुख दायित्व छह माह के भीतर आम चुनाव कराना होगा। सुशीला कार्की का नाम राष्ट्रपति, सेना प्रमुख और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेन-जी समूह के प्रतिनिधियों के बीच हुई सहमति के बाद तय हुआ। इसके लिए राष्ट्रपति ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों, कानूनी विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी से भी अलग-अलग परामर्श किया। सूत्रों के अनुसार, कार्की एक छोटा मंत्रिमंडल गठित करेंगी। मंत्रिमंडल की पहली बैठक में संसद भंग करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजे जाने की संभावना है।
दिनभर की बैठकों के बाद कार्की के नाम पर बनी सहमति : नेपाल में पिछले चार दिनों से जारी सियासी उथल-पुथल के बीच आखिरकार शुक्रवार देर शाम अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सका। राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल और आंदोलनकारी जेन-जी समूह के प्रतिनिधियों के बीच दिनभर चली बातचीत के बाद देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनी।
नेपाल की मीडिया के अनुसार, बैठक में जेन-जी प्रतिनिधियों ने नेताओं की संपत्ति जांचने की मांग उठाई, जिस पर नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन कुमार थापा ने कहा कि हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति और सेना प्रमुख ने शांति बहाल करने और कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा उपायों पर भरोसा भी दिलाया। साथ ही संसद भंग करने पर भी सभी पक्ष राजी हो गए। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की अगुवाई कर रहे जेन-जी समूह ने ही सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया था। आंदोलनकारियों का कहना था कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसी साफ-सुथरी और ईमानदार छवि वाली हस्ती को करना चाहिए। उनकी इस मांग पर सहमति बनने के बाद कार्की का प्रधानमंत्री बनना तय हो गया।
गौरतलब है कि सोमवार को भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ भड़के युवा आंदोलन के बाद नेपाल हिंसा की चपेट में आ गया था। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने संसद परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की। कई शहरों में पुलिस से झड़प और गोलीबारी हुई। हालात बिगड़ने पर सेना ने कमान संभाल ली और पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसी माहौल के बीच मंगलवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
