डीजीसीए ने शुरू की विमान सेवाओं की गहनता से जांच

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नई दिल्ली, देव कुमार। अहमदाबाद विमान हादसे के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी विमान सेवाओं की गहनता से जांच (ऑडिट) शुरू करा दी है। जांच के लिए विमानन कंपनियों से जरूरी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। डीजीसीए विमानन कंपनियों से ट्रेनिंग से लेकर विमानों के रखरखाव, ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़ी जानकारी मुहैया कराने को कहा गया है। उधर, एयर इंडिया के विमानों से जुड़े दस्तावेजों के साथ चालक दल की उड़ान योग्यता की स्थिति, प्रशिक्षण और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। विमानन क्षेत्र पर निगरानी रखने वाला डीजीसीए चाहता है कि पूरे विमानन क्षेत्र का गहन ऑडिट हो, जिससे वैश्विक मानकों के हिसाब से देश में उड़ान सेवाएं संचालित हो सके। ऑडिट से जुड़ा विस्तृत आदेश पहले से जारी किया जा चुका है। अब आदेश के क्रम में जांच शुरू कर दी गई है। इसमें डीजीसीए के क्षेत्रीय कार्यालयों की भी मदद ली जा रही है। अहमदाबाद विमान हादसे के बाद से लगातार उड़ान सेवाएं निरस्त हो रही हैं। तकनीकी खराबी के साथ विमानन कंपनियों के ग्राउंड हैंडलिंग और तकनीकी स्टाफ और चालक दल के बीच समन्वय की कमी के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर की जांच के बाद डीजीसीए ने पाया कि बीते कुछ समय में विमानन कंपनियों का सारा ध्यान सिर्फ अपनी उड़ान सेवा का विस्तार करना और अधिक संख्या में यात्रियों को जुटाने पर रहा है। यात्रियों से जुड़ी सेवाओं को बेहतर करने, निर्धारित मानकों के हिसाब से विमान सेवा का परिचालन करने और बेहतर तालमेल को लेकर कोई काम नहीं किया गया। अहमदाबाद विमान हादसे के बाद डीजीसीए ने निगरानी बढ़ाई तो विमानन कंपनियों के अंदर तमाम खामियां सामने आई हैं। इसी कमी का पता चलने पर एयर इंडिया के तीन अधिकारियों को तत्काल कार्य से हटाने का निर्देश दिया गया। सूत्रों का कहना है कि डीजीसीए द्वारा विशेष व्यापक ऑडिट को लेकर निर्धारित किए गए मापदंडों के हिसाब से जांच में लंबा समय लगेगा। क्योंकि इसमें हर तरह के काम का ऑडिट होगा। दस्तावेजों की मांग की जाएगी, फिर उन्हें नियमों के हिसाब से देखा जाएगा कि विमानन कंपनियां अपनी सेवा में नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं। उदाहरण के लिए अगर विमान दल की ड्यूटी अवधि का ऑडिट किया जाना है तो उसमें पूरे रोस्टर को खंगाला जाएगा। उसके बाद देखा जाएगा कि विमानन कंपनी एक पायलट को महीने में कितने घंटे की ड्यूटी दे रही है और फिर कितने घंटे का आराम दे रही है। बाकी पायलट को भी इतनी ही ड्यूटी दी जा रही है या फिर उसमें कोई कटौती की जा रही है। इसलिए हर नजरिए से दस्तावेजों के आधार पर जांच पूरी होने में समय लगेगा।

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