लखनऊ, राजेंद्र तिवारी। सीबीआई की टीम ने रेलवे में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ करते हुए डिप्टी चीफ इंजीनियर समेत पांच अधिकारियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक लखनऊ और दो वाराणसी के अफसर शामिल हैं।
सीबीआई ने उत्तर रेलवे के गति शक्ति प्रोजेक्ट में रिश्वतखोरी के प्रकरण में लखनऊ, वाराणसी और गाजियाबाद में छापा मारा। इस दौरान दोषी मिले लखनऊ व वाराणसी डीआरएम आफिस के तीन इंजीनियरों और ठेकेदार कंपनी टैंगेंट इन्फोटेक लि. के संचालक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में दोषी पाए गए लखनऊ डीआरएम आफिस के डिप्टी चीफ इंजीनियर, वाराणसी के पांच अधिकारी और ठेकेदार कंपनी के तीन कर्मचारियों समेत 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गिरफ़्तार पांचों आरोपितों को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 28 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इन आरोपितों के पास साढ़े तीन लाख रुपये बरामद हुए थे। छापे के दौरान फरार असिस्टेंट इंजीनियर केके मिश्र व पांच अन्य की तलाश की जा रही है। सीबीआई को शिकायत मिली थी कि गति शक्ति उत्तरी रेलवे के तहत भदोही व वाराणसी में रेलवे ट्रैक का काम कराया जा रहा है। दिल्ली की कंपनी टैंगेंट प्रा. लि. को भुगतान करने के लिए अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगी जाती है। रिश्वत लेकर ये अफसर रेलवे ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। इसके बाद ही सीबीआई ने लखनऊ में चार, वाराणसी में छह और गाजियाबाद में एक स्थान पर छापा मारा था। इस कार्रवाई में डिप्टी चीफ इंजीनियर विवेक कुशवाहा, सेक्शन इंजीनियर अशोक रंजन, कार्यालय अधीक्षक अंजुम निशां और टैनजेंट कम्पनी के संचालक प्रवीण कुमार सिंह व जिमी सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के मुताबिक डिप्टी चीफ इंजीनियर के पास ढाई लाख रुपये बरामद हुए थे। इन कार्यालयों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले हैं। इसके भी साक्ष्य मिले हैं कि संचालक प्रवीण ने अपने कर्मचारी जिमी के माध्यम से इसी साल 21 जून और 26 जून को वाराणसी में राकेश रंजन को दो लाख रुपए रिश्वत एक क्लब में दी थी। सीबीआई की टीम ने विवेक कुशवाहा, उप मुख्य अभियंता,उत्तर रेलवे लखनऊ, राकेश रंजन, वरिष्ठ उप अभियंता (समन्वय) एनईआर वाराणसी, मनीष, ओएस, डीआरएम कार्यालय, पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी, अभिषेक गुप्ता, एसएसई वर्क्स, एनईआर वाराणसी, योगेश गुप्ता, एईएन एनईआर वाराणसी, सुशील कुमार राय, एईएन वाराणसी मंडल, प्रवीण कुमार सिंह, टैंगेंट इंफ्राटेक लि. दिल्ली, जिमी सिंह, टेंगेंट इंफ्राटेक लि. दिल्ली के अलावा दो अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि विवेक कुशवाहा ने रिश्वत लेकर भिन्नता वाले बिलों को मंजूरी दी जिससे ठेकेदार और स्वयं को गलत लाभ हुआ। वहीं प्रवीण कुमार सिंह ने जिमी सिंह को भिन्नता बिल मामले की अनुशंसा करने के लिए राकेश रंजन, वरिष्ठ डीईएन (समन्वय) को दो लाख रुपये की रिश्वत देने का निर्देश दिया था।
