नई दिल्ली, नीलू सिंह। नक्सलियों के खत्मा के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है। दंतेवाड़ा के गंगलोर में दो दिनों से जारी मुठभेड़ में 12 नक्सली ढेर हो गए। वहीं तीन जवान में मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। मुठभेड़ स्थल के आसपास से बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए गए हैं। सिंगल लोडिंग राइफल, 303 राइफल के साथ अन्य हथियार और विस्फोटक बरामद किया गया है।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान बुधवार को 12 नक्सलियों को मार गिराया। कार्रवाई के दौरान डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के तीन जवान शहीद हो गए। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है और जंगलों में अन्य नक्सलियों की तलाश की जा रही है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पाटलिंगम ने बताया कि बस्तर मंडल में दंतेवाड़ा से लगे गंगलोर क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षाबल नक्सलियों की तलाश में अभियान चला रहे थे। इसी दौरान मुठभेड़ शुरू हो गई। डीआरजी के साथ स्पेशल टास्क फोर्स और सीआरपीएफ के कोबरा कमांडों ने मोर्चा संभाला और 12 नक्सलियों को मार गिराया गया। मुठभेड़ में मारे गए सभी नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। इस दौरान डीआरजी के हेड कांस्टेबल मोनू वडाडी, कांस्टेबल दुकारु गोंडे और जवान रमेश सोढ़ी शहीद हो गए। वहीं डीआरजी के दो जवान घायल हुए हैं जिनका इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने जंगल के आसपास के पूरे इलाकों को घेर लिया है। अलग-अलग टीमें नक्सलियों और हथियार जब्त करने के मिशन में जुटी हैं। सुरक्षाबलों के पास जो इनपुट है उसी आधार पर टीमें जंगलों की खाक मार रही हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि सुरक्षाबलों की कई टीमें आसपास के क्षेत्रों में हथियारों का भंडार पता करने में जुटी हैं। संभावना जताई जा रही है कि नक्सलियों ने इस इलाके में हथियार छुपा कर रखा है। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को मौके पर रवाना कर दिया गया है। पुलिस और अन्य बलों ने सीमावर्ती क्षेत्रों पर सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है। संदिग्धों से पूछताछ का दौर जारी है। किसी भी हालात से निपटने के लिए टीमें पूरी तरह से तैयार हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में इस साल 268 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इसमें से 239 नक्सली बस्तर मंडल में मारे गए हैं। मालूम हो केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने को प्रतिबद्ध है। इसी के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों का अभियान जारी है। नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसर्मपण भी किया है।
