एआई की लत बढ़ने से युवा अब हो रहे हैं दोस्त से दूर

अंतरराष्ट्रीय

लंदन। आज के दौर में तकनीक हर समस्या का समाधान पेश करती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के मामले में यह नया खतरा बनती जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई को अपना काम सौंपने से हमारी क्रिटिकल थिंकिंग (सोचने की क्षमता) कमजोर हो रही है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्टडी में 54 छात्रों की ब्रेन एक्टिविटी की जांच की गई। जिन लोगों ने निबंध लिखने के लिए एआई का इस्तेमाल किया, उनके दिमाग के उन हिस्सों में बहुत कम हलचल देखी गई जो गहरी सोच से जुड़े होते हैं। तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ मदद के लिए होना चाहिए, दिमाग को उस पर निर्भर नहीं करना चाहिए।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं की हालिया रिपोर्ट बताती है कि युवाओं की बड़ी संख्या अब ‘असली दोस्तों’ के बजाय एआई चैटबॉट (जैसे चैटजीपीटी) से भावनात्मक समर्थन ले रही है। शोध में पाया गया कि चैटबॉट इंसानों की तुलना में ज्यादा धैर्यवान और हर समय उपलब्ध होते हैं। वे बहस नहीं करते और मुश्किल सवाल नहीं पूछते। अकेलेपन से जूझ रहे युवा इन्हें अपना ‘सबसे अच्छा दोस्त’ मानने लगते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 10 में से 1 युवा को इंसानी बातचीत की तुलना में एआई से बात करना ज्यादा संतोषजनक लगता है। जो लोग महीने भर में सबसे ज्यादा समय चैटबॉट पर बिताते हैं, वे असली जीवन में खुद को और ज्यादा अकेला महसूस करने लगते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हम ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, जो मशीनों से इमोशनल रिश्ते बनाने लगी है, जिनमें सहानुभूति और असली भावनाओं की कमी होती है। कुछ मामलों में यह निर्भरता गंभीर और जानलेवा भी साबित हुई है। अमेरिका में एक 14 साल के किशोर ने कस्टमाइजेबल चैटबॉट के साथ भावनात्मक रिश्ता बनाने के बाद आत्महत्या कर ली, और उसके परिवार ने एआई कंपनी के खिलाफ कानूनी कदम उठाया। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि डॉक्टरों को अब अपने मरीजों से उनके चैटबॉट इस्तेमाल पर चर्चा करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति यह मानने लगे कि उसका चैटबॉट के साथ खास रिश्ता है या वह बड़े फैसलों के लिए सिर्फ एआई पर निर्भर है, तो यह चेतावनी का संकेत है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि एआई को इस तरह डिजाइन किया जाए कि वह इंसानों की जगह न ले, बल्कि यूजर को परिवार और दोस्तों से जुड़ने के लिए प्रेरित करे। तकनीक सहारा बन सकती है, लेकिन यह कभी भी हृदय और संवेदनाओं वाले असली इंसान का विकल्प नहीं बन सकती। इसलिए युवाओं को अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि वे असली रिश्तों की गर्माहट और समर्थन महसूस कर सकें। यह खबर स्पष्ट करती है कि तकनीक जितनी भी आकर्षक हो, असली दोस्ती और इमोशनल कनेक्शन की जगह कोई मशीन नहीं ले सकती।

 

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