नई दिल्ली, नीलू सिंह।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रव्यापी मोर्चा बनाकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह पारित विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्यों और गांवों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, गुरुवार रात केंद्र सरकार ने एक ही झटके में मनरेगा के 20 वर्षों को ध्वस्त कर दिया। यह विधेयक मनरेगा का पुनर्गठन नहीं है, बल्कि अधिकार आधारित और मांग आधारित गारंटी को खत्म कर इसे एक सामान्य योजना में बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, यह विधेयक राज्य-विरोधी और गांव-विरोधी है तथा इसे दिल्ली से नियंत्रित किया जाएगा। मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को मोलभाव की ताकत दी थी। वास्तविक विकल्प मिलने से शोषण और मजबूरी में होने वाला पलायन घटा, मजदूरी बढ़ी और काम की परिस्थितियां बेहतर हुईं। राहुल गांधी ने कहा, कोविड-19 के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि मनरेगा का क्या महत्व है। जब अर्थव्यवस्था ठप हो गई और आजीविकाएं खत्म हो गईं, तब इस योजना ने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज में डूबने से बचाया। इसका सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को मिला। इस कानून को संसद में बिना उचित जांच-पड़ताल के जबरन पारित कराया गया। विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की विपक्ष की मांग को भी खारिज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया, केंद्र सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है, श्रम को कमजोर करना, ग्रामीण भारत विशेषकर दलितों, ओबीसी और आदिवासियों की मोलभाव की ताकत को खत्म करना और सत्ता का केंद्रीकरण करना। विकसित भारत जी-राम-जी के खिलाफ कांग्रेस देशभर में आंदोलन की तैयारी कर रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने संसद में यह विधेयक जबरन पारित कराया है और इसका सीधा असर गरीबों, दलितों, आदिवासियों तथा पिछड़ों पर पड़ेगा। राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए कांग्रेस ने 27 दिसंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक बुलाई है। कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने विकसित भारत जी-राम-जी को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, इसका सीधा प्रभाव समाज के हर कमजोर वर्ग पर पड़ेगा। कांग्रेस इसके खिलाफ देशभर में अभियान शुरू करेगी और जिन वर्गों पर इस कानून का असर होगा, उनके साथ मिलकर इसके खिलाफ संघर्ष किया जाएगा। बैठक में आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि जिस तरह जनदबाव के चलते सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी तरह यह विधेयक भी वापस लिया जाएगा।
