पटना,राजेंद्र तिवारी।
माटी को सोना करने वाली कलाकारी है जी। हां हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी। पवन सिंह और मनोज तिवारी ने इस गीत से पटना के गांधी मैदान में समा बांध दिया। तो वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने गमछा लहराकर पूरे गांधी मैदान में जोश भर दिया।
बिहार की संस्कृति में गमछा का विशेष महत्व है। कंधे पर गमछा रखना अथवा गले में लपेट लेना, यहां के लोगों को खूब भाता है। गांधी मैदान में गुरुवार को हुए एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में इस संस्कृति की भरपूर झलक मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से जब गमछा लहराया तो पूरा मैदान जोश से भर गया। पीएम ने अपने इस अंदाज से बड़ी जीत पर बिहार को शुक्रिया भी कहा। वहीं, गांधी मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने भी गमछा लहराकर प्रधानमंत्री का अभिवादन किया। बड़ी संख्या में लोग कुर्सियों पर चढ़कर गमछा लहराते दिखे।
समारोह में जब भी कोई विशिष्ठ अतिथि पहुंच रहे थे, जनता गमछा हिलाकर उनका अभिवादन कर रही थी। मंच से लगातार गमछा लहराने की उद्घोषणा हो रही थी। गायक मनोज तिवारी और पवन सिंह भी गीत की प्रस्तुति के दौरान बार-बार गमछा लहरा रहे थे। गांधी मैदान में शपथ ग्रहण 11.30 बजे से था, पर इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए सुबह नौ बजे से ही लोग गांधी मैदान पहुंचने लगे थे। गांधी मैदान में मौजूद सभी आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए थे कि प्रधानमंत्री कब आएंगे। सबको मालूम था कि हेलीकॉप्टर से प्रधानमंत्री आने वाले हैं। सवा ग्यारह बजे आसमान में हेलीकॉप्टर दिखा तो सभी के चेहरे खिल उठे। खासकर वहां मौजूद युवा हेलीपैड की ओर दौड़े, जहां हेलीकॉप्टर उतरने की जगह बनायी हुई थी, ताकि प्रधानमंत्री की झलक उन्हें मिल सके। दूर से महिलाओं को प्रधानमंत्री नहीं दिख रहे थे तो वे अपनी-अपनी कुर्सी पर खड़ी हो गईं, ताकि पीएम को देख सकें।
गांधी मैदान पहुंचने के रास्तों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी थी। इस कारण लोग दो-ढाई किलोमीटर पैदल चलकर गांधी मैदान पहुंच रहे थे। गांधी मैदान में यह पहला मौका था, जब किसी समारोह में पुरुष से अधिक संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। हाथों में झंडा अथवा बैनर लिये महिलाएं कतार में गांधी मैदान की ओर हर तरफ दिख रही थीं। हालांकि, गांधी मैदान में बैग लेकर जाने की इजाजत नहीं थी, जिस कारण कई महिलाएं परेशान भी हुईं।
