अभिनेता मनोज कुमार का मुंबई में निधन, सिनेमा प्रेमियों में शोक की लहर
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा का वो चमकता सितारा, जिसने देशभक्ति को अपनी पहचान बनाया, आज हमेशा के लिए खामोश हो गया। मनोज कुमार, जिन्हें प्यार से ‘भारत कुमार’ कहा जाता था, ने 87 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। लंबे समय से स्वास्थ्य से जूझ रहे इस दिग्गज को शुक्रवार सुबह दिल का दौरा पड़ा, और इसके साथ ही सिनेमा का एक सुनहरा अध्याय थम गया। देशभक्ति का पर्याय, सिनेमा का संन्यासीमनोज कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे—वो एक विचार थे, एक भावना थे। ‘पूरब और पश्चिम’ में उनका गीत—‘भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं’—आज भी हर दिल में देशप्रेम की आग जगा देता है।

‘उपकार’, ‘रोटी, कपड़ा और मकान’, और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों से उन्होंने न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि समाज के सामने आईना रखा और राष्ट्र की भावना को पर्दे पर जीवंत किया। उनकी सादगी और संवेदनशीलता ने उन्हें आम आदमी का हीरो बना दिया। शोक में डूबा देश, सितारे नम आंखों से विदा करेंगेउनके निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री और पूरे देश को गमगीन कर दिया। मुंबई के जुहू स्थित विशाल टॉवर में दोपहर को उनके अंतिम दर्शन होंगे, और शनिवार को पवन हंस श्मशान घाट में उन्हें आखिरी विदाई दी जाएगी। फैंस और सितारे इस ‘भारत’ को नम आंखों से अलविदा कहने को तैयार हैं।

सम्मानों से नवाजा गया ‘भारत का बेटा’ :मनोज कुमार का फिल्मी सफर सम्मानों से भरा रहा। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सात फिल्मफेयर अवॉर्ड, पद्म श्री (1992) और दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2015) जैसे सम्मानों ने उनके योगदान को सलाम किया। लेकिन सबसे बड़ा पुरस्कार था दर्शकों का प्यार, जिन्होंने उन्हें ‘भारत’ का प्रतीक माना।
परदा गिरा, मगर गूंज बाकी :आज भले ही मनोज कुमार हमारे बीच न हों, लेकिन उनका सिनेमा, उनके गीत, और उनकी देशभक्ति की खुशबू हमेशा जिंदा रहेगी। वो चले गए तो क्या, हर फ्रेम में, हर नोट में, भारत की मिट्टी की महक अब भी बसी है। परदे का ‘भारत’ शायद सितारों के बीच चला गया, मगर उसकी कहानी हमारे दिलों में हमेशा गूंजती रहेगी।