इतिहास और कला का संगम देख केवि के छात्र उत्साहित

राज्य समाचार वाराणसी

सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में केवि के छात्रों ने ली जानकारी
वाराणसी, राजेंद्र तिवारी। पुस्तकों की सीमाओं से बाहर निकलकर जब शिक्षा अनुभवों से जुड़ती है, तब ज्ञान केवल जानकारी नहीं बल्कि प्रेरणा बन जाता है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय 39 जीटीसी के कक्षा सातवीं के 60 विद्यार्थियों को 10 फरवरी 2026 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भारत कला भवन का भ्रमण कराया गया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंद्र भूषण प्रकाश वर्मा ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उन्हें व्यावहारिक शिक्षा, विषयों की गहरी समझ और नई प्रेरणा प्रदान करता है। कक्षा की किताबों से परे वास्तविक दुनिया से जुड़ने का अवसर विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीम वर्क और आलोचनात्मक सोच जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित करता है तथा उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है। इस शैक्षणिक यात्रा के दौरान शिक्षक आरबी सिंह, पंकज शर्मा एवं शिक्षिका प्रिया सिंह विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे और उन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन किया।


भारत कला भवन में विद्यार्थियों ने सिंधु घाटी सभ्यता के टेराकोटा (मृदभांड) अवशेषों को देखा, मथुरा एवं गांधार कला की मूर्तियों का अवलोकन किया और मुगलकाल से लेकर राजस्थानी एवं पहाड़ी शैली के लघु चित्रों की अद्भुत कलात्मकता को सराहा। पोस्टकार्ड के आकार के इन सूक्ष्म चित्रों ने विद्यार्थियों को भारतीय चित्रकला की बारीकी और सौंदर्य से परिचित कराया। इसके अतिरिक्त महान रूसी चित्रकार निकोलस रोरिक द्वारा रचित हिमालय के मनोरम दृश्य और उनकी अनूठी टेम्पेरा एवं तेल चित्रों की श्रृंखला ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन चित्रों में प्रकृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने छात्रों को गहन भावनात्मक और बौद्धिक अनुभव प्रदान किया। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और कला से आत्मीय जुड़ाव का अवसर साबित हुआ।

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