कौन हैं शुभांशु, जिन्होंने अंतरिक्ष में जाकर दोहराया इतिहास

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लखनऊ, राजेंद्र तिवारी।
आखिरकार लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला 14 दिन के अंतरिक्ष यात्रा पर निकल ही गए। लंबे इंतजार के बाद किसी भारतीय का यह अंतरिक्ष यात्रा है। शुभांशु दूसरे भारतीय जो अंतरिक्ष में गए हैं। इससे पूर्व 41 साल पहले राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थ। शुभांशु ने 41 साल पुराने इतिहास को दोहराने में कामयाबी हासिल की है। इस मिशन में चार लोग शामिल हैं, जिनमें लखनऊ में जन्मे और भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुक्ला, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की अंतरिक्ष यात्री पूर्व मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन, हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू और पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा हैं। खास बात यह है कि शुभांशु अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। वहीं शुक्ला के माता-पिता लखनऊ स्थित उस स्कूल में इस ऐतिहासिक उड़ान के गवाह बने, जहां उन्होंने पढ़ाई की थी। इस दौरान दोनों भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। शुभांशु के पिता शंभू शुक्ला ने कहा कि यह न केवल हमारे लिए बल्कि देश के लिए भी एक महान क्षण है। हम इस समय क्या कह सकते हैं, मेरे पास अब शब्द नहीं हैं। मेरा आशीर्वाद हमेशा मेरे बेटे के साथ है। मां आशा शुक्ला ने कहा कि इस समय मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है। मैं बहुत खुश हूं। मुझे पता है कि वह सफल होगा।
एक्सिओम स्पेस के वाणिज्यिक मिशन के तहत बुधवार दोपहर करीब 12 बजे तीन अन्य विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा के लिए रवाना हुए। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट ने भारतीय समय अनुसार दोपहर करीब 12 बजे एक्सिओम मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के लेकर फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी। रॉकेट प्रक्षेपण के 10 मिनट बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने धरती का चक्कर काटना शुरू कर दिया। इसके बाद शुक्ला ने अपने संदेश में कहा कि 41 साल बाद भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा में वापसी हुई है। ड्रैगन अंतरिक्ष यान के धरती से 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश करने के तुरंत बाद शुक्ला ने कहा, ‘कमाल की यात्रा थी।’ करीब 28 घंटे की यात्रा के बाद यान के गुरुवार शाम साढ़े चार बजे आईएसएस पहुंचने की उम्मीद है। यह यात्रा भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए मानव अंतरिक्ष अभियान को आगे बढ़ाएगा। शुक्ला 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए। 1984 में राकेश शर्मा तत्कालीन सोवियत संघ के सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन के तहत कक्षा में आठ दिन रहे थे।
अंतरिक्ष में प्रवेश के बाद शुक्ला ने कहा, ‘नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों। 41 साल बाद हम अंतरिक्ष में पहुंच गए हैं। यह कमाल की यात्रा थी। इस समय हम साढ़े सात किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं और मेरे कंधे पर मेरे साथ मेरा तिरंगा है। यह मुझे बता रहा है कि मैं अकेले नहीं, बल्कि आप सबके साथ हूं। यह मेरी आईएसएस तक की यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत है। मैं चाहता हूं कि आप सभी देशवासी इसका हिस्सा बनें। आइये, हम सब मिलकर भारत की इस मानव अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत करें।’ वहीं तरिक्ष की कक्षा में पहुंचने के बाद यात्रियों ने अपने नए कैप्सूल का नाम ‘ग्रेस’ बताया। स्पेसएक्स ने चालक दल को बताया कि जो धैर्य रखते हैं, उनके साथ अच्छी चीजें होती हैं। ग्रेस के पहले चालक दल को ईश्वर का आशीर्वाद मिले। अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में 14 दिन बिताएंगे और अपने मिशन के दौरान 60 प्रयोग करेंगे। अंतरिक्ष यात्री अपने देश से जुड़े पसंदीदा खाद्य पदार्थ भी साथ ले गए हैं। शुभांशु अपने साथ आम रस और करी-चावल ले गए हैं, तो हंगरी के अंतरिक्ष यात्री मसालेदार पेपरिका पेस्ट और पोलैंड के यात्री फ्रीज-फ्राइड ‘पिरोगी’ ले गए हैं। उड़ान से पहले शुक्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह अपने देश की एक पूरी पीढ़ी की जिज्ञासा को जगा पाएंगे और नवाचार को बढ़ावा दे पाएंगे। कहा, ‘मैं वास्तव में मानता हूं कि भले ही मैं एक व्यक्ति के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा हूं, लेकिन यह 140 करोड़ भारतीयों की यात्रा है।’ ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत में शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेस’ का गाना ‘यूं ही चला चल राही’ सुना। दिलचस्प है कि इस फिल्ल में शाहरुख ने नासा के एक वैज्ञानिक की भूमिका निभाई थी। शुक्ला जिस मिशन पर हैं, उसमें भी नासा का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

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