नई दिल्ली, नीलू सिंह। नागपुर में सोलर इंडस्ट्रीज के मीडियम कैलिबर गोला बारूद सुविधा के उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सोलर ग्रुप द्वारा निर्मित नागास्त्र ड्रोन का उपयोग किया गया था। इस ड्रोन ने देश की ओर बुरी नजर रखने वाले आतंकियों के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर अपनी रणनीतिक क्षमता को सिद्ध किया।
राजनाथ सिंह ने बताया कि नागास्त्र के और भी अधिक आधुनिक वर्जन अब विकसित किए जा चुके हैं। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर ये हथियार शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय पिनाका मिसाइलों का निर्यात भी शुरू हो चुका है। कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई है। इस तरह की उपलब्धियां न केवल हमारे रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि भारत की निर्यात क्षमता को भी और अधिक सशक्त बनाती हैं। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने सोलर ग्रुप द्वारा निर्मित गाइडेड पिनाका रॉकेट की पहली खेप को आर्मेनिया के लिए हरी झंडी दिखाई। रक्षा मंत्री ने कहा कि अगले कुछ महीनों में ही, इसके सभी परीक्षण पूरे हो जाने के बाद, हमारी सेना इसे देश की रक्षा के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल कर सकेगी। उन्होंने कहा कि भार्गवास्त्र भी विकसित कर रहे हैं। यह एक माइक्रो मिसाइल आधारित प्रणाली है। इसका एक सफल परीक्षण पहले हो चुका है। रक्षामंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता, हमारे लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है, इसको लेकर भी मुझे, ऑपरेशन सिंदूर का उदहारण याद आ रहा है। लगभग 88 घंटे तक ऑपरेशन सिंदूर चला था, लेकिन वह 88 घंटे अपने आप में कितने विस्तृत और कितने गहन थे, यह शब्दों में बताना मुश्किल है। ऐसे ऑपरेशन में हर मिनट, हर फैसला और हर संसाधन का महत्व होता है। और जब ऑपरेशन इतने गहन होते हैं, तो यह मान लेना स्वाभाविक है कि उनकी तैयारी भी उतनी ही व्यापक, गंभीर और मजबूत होनी चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। युद्ध के नए तरीके सामने आ रहे हैं। युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। इन बदलावों के बावजूद, मैं बहुत सावधानी और पूरे विश्वास के साथ कहना चाहूंगा कि हमारी सीमाओं की निगरानी, हमारे हथियारों, हार्डवेयर और हमारे रक्षा औद्योगिक विनिर्माण आधार का महत्व किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है, बल्कि, कई मामलों में, यह पहले की तुलना में बढ़ा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में हमने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में, जो मेहनत की, उसका परिणाम यह है कि हमारा घरेलू रक्षा उत्पाद, जो 2014 में मात्र 46,425 करोड़ रुपए था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। बड़ी बात यह है कि इसमें से 33000 करोड़ रुपए से अधिक का योगदान प्राइवेट सेक्टर से आना, यह दर्शाता है कि आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान में निजी उद्योग भी भागीदार बन रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी का ही परिणाम है कि भारत का रक्षा निर्यात, जो दस वर्ष पहले 1000 करोड़ रुपए से भी कम था, वह बढ़कर रिकॉर्ड 24000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि एक समय था कि रक्षा उत्पादन लगभग पूरा का पूरा पब्लिक सेक्टर तक सीमित था। प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बहुत सीमित थी। धीरे-धीरे इस सोच को बदलने का प्रयास किया गया। सरकार का ध्यान सिर्फ इस बात पर नहीं है कि रक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर का योगदान बढ़ना चाहिए, बल्कि इस बात पर भी है कि आने वाले समय में रक्षा निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका 50 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा हो।
