बिहार ने वोटिंग में बनाया रिकार्ड, औसत 67 फीसदी मतदान

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पटना, राजेंद्र तिवारी।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे व अंतिम चरण में बिहार के मतदाताओं ने रिकार्ड मतदान किया। दो चरणों में हुए मतदान में औसत 67 फीसदी वोट डाले गए। मंगलवार को हुए दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर रिकॉर्ड 69 फीसदी मतदान हुआ है। यह पहले चरण में हुए 65.08 फीसदी मतदान की तुलना में चार फीसदी से अधिक है। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल के मुताबिक अभी 2000 मतदान केंद्रों की रिपोर्ट आनी बाकी है। इसके आने पर मतदान का आंकड़ा बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि दोनों चरण मिला कर बिहार में कुल 66.90 फीसदी मतदान हुआ है। यह आंकड़ा 2020 विधानसभा चुनाव की तुलना में 9.6 फीसदी अधिक है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने मतदान में बढ चढञकर हिस्सा लिया। दो चरणों में 243 विधानसभा क्षेत्रों मे पड़े मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।
दूसरे चरण के मतदान के साथ ही दिग्गज नेताओं में पूर्व उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद व रेणू देवी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम कुमार, कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, हम के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार एवं लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी 1302 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया।
दूसरे चरण के मतदान के बाद राज्य स्तरीय नियंत्रण कंक्ष में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बिहार के सीईओ विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर दोनों चरणों का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। दूसरे चरण के मतदान की समाप्ति के बाद अभी करीब दो हजार बूथों से मतदान के आंकड़ों का संग्रह होना शेष है। अबतक के आंकड़ों के अनुसार, इस बार चुनाव में कटिहार में सर्वाधिक 78.63 प्रतिशत, किशनगंज में 78.06 प्रतिशत और पूर्णिया में 76.04 प्रतिशत मतदान हुआ। जबकि, सबसे कम नवादा में 57.85 प्रतिशत, पटना में 59.02 प्रतिशत एवं नालंदा में 59.01 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दूसरे चरण में भी बूथों पर बड़ी संख्या में महिलाओं को कतारों में देखा गया। सीमांचल की 24 सीटों में पूर्णिया जिले के कसबा में सबसे अधिक 80.89 प्रतिशत मतदान हुआ।
सीईओ गुंजियाल ने बताया कि देश में पहली बार बिहार में दोनों चरणों की सभी बूथों से लाइव वेबकास्टिंग की गई। दूसरेचरण में नक्सल प्रभावित सात विधानसभा क्षेत्रों चैनपुर, रजौली (सु), गोविंदपुर, सिकंदरा (सु), जमुई, झाझा एवं चकाई एवं 1202 बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ही मतदान हुआ। नक्सल इतिहास वाले जिलों में कई बूथों पर दो दशकों बाद पहली बार मतदान हुआ, किसी भी बूथ को स्थानांतरित नहीं किया गया। इस चुनाव में कोई हेली ड्रॉपिंग नहीं की गई। स्टेट पुलिस नोडल अधिकारी सह एडीजी, मुख्यालय कुंदन कृष्ण ने बताया कि जमुई के चोरमारा में दो दशक के बाद ग्रामीणों ने अपने बूथ पर मतदान किया। इसी प्रकार, गया जी के बाराचट्टी स्थित गांवों के बूथों एवं रोहतास के रेहल एवं कैमूर के अघौरा पहाड़ पर स्थित बूथों पर कड़ी सुरक्षा में मतदाताओं ने निर्भीक होकर मतदान किया। मतदान के दौरान कुल 990 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया एवं 10 वाहनों को जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों चरणों में 1625 केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों, बी-सैप, जिला पुलिस के सहयोग से दो दशक के बाद शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुआ। राज्य के मतदाताओं ने इस बार विधानसभा चुनाव में पूर्व के सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तुलना में अधिक मतदान किया है। 2020 विधानसभा चुनाव में कुल 57.29 फीसदी, जबकि 2015 विधानसभा चुनाव में कुल 56.66 फीसदी वोट पड़े थे। सीमांचल के किशनगंज जिले के मतदाताओं ने 77.66 फीसदी वोटिंग कर नया रिकॉर्ड बनाया है। दूसरे चरण में सबसे कम वोटिंग नवादा जिले में 57.78 फीसदी हुई। बिहार में 1951 से लेकर अबतक हुए (सभी लोकसभा एवं विधानसभा) चुनावों में इसके पहले कभी मतदान का प्रतिशत राज्य में इतना नहीं रहा था। 1951 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 40.35 फीसदी तो उसी वर्ष विधानसभा चुनाव में 42.6 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं, 1998 के लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 64.60 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2000 के विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक 62.57 प्रतिशत मतदान हुआ था। जानकारी के अनुसार तिरहुत प्रक्षेत्र के छह जिले में बिहार की 49 विधानसभा सीटें हैं। पिछली बार (2020) की तुलना में इस बार इन सभी जिलों के मतदाताओं ने बम्पर वोटिंग की। यह पिछली बार से औसतन 11 फीसदी ज्यादा है। बीते कई चुनावों को देखें तो तिरहुत प्रक्षेत्र में एनडीए का दबदबा रहा है। खासकर भाजपा को इस इलाके में सबसे अधिक सीटें मिलती रही हैं।

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